खुद बचने की कोशिश में है जिम्मेदार केजीएमयू के अधिकारी

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री अमृत फार्मेसी में गड़बड़ी पर कुछ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। इसलिए केजीएमयू प्रशासन ने इस मामले में अपना जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया है। बिना डॉक्टर के पर्चे पर नारकोटिक्स व शिड्यूल-एच की दवाओं की बिक्री की दवा व दस्तावेज खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) को छापेमारी के दौरान मिले थे। केजीएमयू प्रशासन अब तर्क दे रहा है कि दवा स्टोर परिसर में खोलने की इजाजत है, उसमें दवाओं की बिक्री क्या आैर कैसे हो रही है। यह काम हम लोगों का नही है।

बताते चले कि केजीएमयू परिसर में अमृत फार्मेसी के पांच स्टोर संचालित होते हैं। पुराने व नई ओपीडी में दो स्टोर हैं। लिम्ब सेंटर, क्वीनमेरी और शताब्दी फेज-वन में दवा स्टोर चल रहे हैं। अमृत फार्मेसी में 60 फीसदी कम कीमत पर दवाएं उपलब्ध हैं। इसके चलते ज्यादातर यहां पर मरीज दवा लेने आ रहे हैं। प्रतिदिन लाखों रुपए की दवाओं की बिक्री हो जाती है। जब कि नारकोटिक्स ग्रुप की दवाओं की बिक्री का लाइसेंस राजधानी के चुनिंदा दवा स्टोर के पास ही है। अमृत फार्मेसी में मरीजों को सस्ती दवाएं मिलती हैं। ऐसे में एफएसडीए ने इन दवाओं की कालाबाजारी की आशंका जाहिर की जा रही है।

बतातो चले कि सीएम कार्यालय में शिकायत के बाद एफएसडीए ने शुक्रवार को क्वीनमेरी व ओपीडी ब्लॉक के स्टोर में छापेमारी कर गड़बड़ी का खुलासा किया था। इसमें नारकोटिक्स व शिड्यूल-एच ग्रुप की दवाओं की बिक्री बिना डॉक्टर की लिखे बिक्री होने के दस्तावेज मिले थे। जांच के दौरान दवाओं का लेखा-जोखा व अन्य दस्तावेज स्टोर संचालक के कर्मचारी नहीं दिखा पाए थे।

अमृत फार्मेसी में दवाओं की बिक्री में गड़बड़ी मिलने के बाद एफएसडीए सतर्क हो गया है। ड्रग इंस्पेक्टर माधुरी सिंह ने बताया कि अमीनाबाद, ठाकुरगंज, चौक, गोमतीनगर, आलमबाग समेत दूसरे इलाकों के मेडिकल स्टोर की भी जांच होने की आशंका हो गयी है। नारकोटिक्स व शिड्यूल एच दवाओं का बैच नम्बर की जांच की जा रही है।

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