लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने गर्भवती महिलाओं में गंभीर एनीमिया से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेशभर में इंट्रावीनस फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (IV-FCM) के जरिए आधुनिक उपचार शुरू किया जाएगा, जिससे एक ही खुराक में आयरन की कमी का तेज और प्रभावी इलाज संभव होगा।
अपर मुख्य सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण व चिकित्सा शिक्षा विभाग अमित कुमार घोष ने यह जानकारी राज्य स्तरीय मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में दी। उन्होंने बताया कि सरकार “एक डोज़, दो ज़िंदगी का वरदान” के मंत्र के साथ एनीमिया नियंत्रण को प्राथमिकता दे रही है। वर्ष 2026 में प्रदेश ने 3.7 लाख इंट्रावीनस आयरन की खुराकें खरीदी हैं, जिन्हें गंभीर एनीमिया से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं को उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत एएनएम, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के जरिए आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंट, डीवॉर्मिंग, पोषण परामर्श और जांच सेवाएं मजबूत की गई हैं। एनएफएचएस-5 के अनुसार प्रदेश में 83.4% प्रसव सरकारी संस्थानों में हो रहे हैं, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार हुआ है।
आंकड़ों के मुताबिक, गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की दर एनएफएचएस-3 के 52% से घटकर एनएफएचएस-5 में 46% हो गई है। किशोरियों में यह 56.5% से घटकर 52.9% और बच्चों में 73.9% से 66.4% पर आ गई है। वहीं, आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन की कवरेज 95% तक पहुंच गई है।
महानिदेशक प्रशिक्षण डॉ. रंजना खरे ने बताया कि 10 हजार से अधिक चिकित्सा अधिकारियों और स्टाफ को नए प्रोटोकॉल, जिसमें IV-FCM शामिल है, पर प्रशिक्षित किया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्क्रीनिंग बढ़ाने और समय पर उपचार सुनिश्चित करने से एनीमिया नियंत्रण में और तेजी आएगी।












