केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों की कमी
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के इमरजेंसी ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों की भारी कमी हो सकती है। बांड के तहत तैनात नॉन-पीजी जूनियर रेजिडेंट (JR) डॉक्टरों को ट्रॉमा ड्यूटी रास नहीं आ रही है, जिसके चलते लगातार इस्तीफों का सिलसिला जारी है। हालात यह हैं कि 11 में से 9 डॉक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं, जबकि दो अभी अवकाश पर हैं।
इस स्थिति से ट्रॉमा सेंटर में मरीजों के इलाज पर असर पड़ने लगा है। केजीएमयू प्रशासन ने पूरे मामले की रिपोर्ट चिकित्सा शिक्षा विभाग के महानिदेशक को भेज दी है।
ट्रॉमा सेंटर की बात करें तो यहां 400 बेड की क्षमता है और रोजाना 200 से 250 मरीज कैजुअल्टी में पहुंचते हैं। इनमें से करीब 80 से 90 मरीजों को भर्ती करना पड़ता है। ऐसे में डॉक्टरों की कमी से इलाज व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।
मार्च में बांड के तहत 11 नॉन-पीजी जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की तैनाती की गई थी। इनका वेतन एक लाख रुपये से अधिक तय किया गया था और इन्हें ट्रॉमा सेंटर में सेवाएं देनी थीं। शुरुआत में कुछ डॉक्टरों ने जॉइन किया, लेकिन धीरे-धीरे अधिकांश ने काम छोड़ दिया।
अचानक बड़ी संख्या में डॉक्टरों के जाने से विभाग में चिकित्सकीय स्टाफ की कमी हो गई है, जिससे मरीजों को समय पर इलाज देने में दिक्कतें बढ़ रही हैं। अब प्रशासन के सामने ट्रॉमा सेवाओं को सुचारु बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।












