यूपी के किसी सरकारी अस्पताल में पहली बार हुई रोबोटिक हिस्टरेक्टॉमी,
केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग का बड़ी सफलता
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर हासिल किया है। डॉ. अंजू अग्रवाल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने पहली बार रोबोटिक हिस्टरेक्टॉमी (गर्भाशय निकालने का ऑपरेशन) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। यह उत्तर प्रदेश के किसी भी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में की जाने वाली अपनी तरह की पहली सर्जरी है।
जटिल स्थिति में रोबोटिक तकनीक बनी वरदान
यह ऐतिहासिक ऑपरेशन गोरखपुर (बटहावरनगर) की रहने वाली 51 वर्षीय मरीज शशिकला का किया गया। मरीज पिछले काफी समय से असामान्य गर्भाशय रक्तस्राव (Abnormal Uterine Bleeding) और अत्यधिक मोटापे की समस्या से ग्रसित थीं। गंभीर मोटापे के कारण पारंपरिक सर्जरी में जोखिम काफी अधिक था, लेकिन रोबोटिक तकनीक की मदद से जटिलताओं को कम करते हुए यह सर्जरी पूरी तरह सफल रही।
5 लाख का इलाज महज 10,000 रुपये में
निजी अस्पतालों में रोबोटिक हिस्टरेक्टॉमी कराने पर आमतौर पर 4 से 5 लाख रुपये तक का भारी-भरकम खर्च आता है। हालांकि, केजीएमयू प्रशासन ने इस सर्जरी को कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के माध्यम से संपन्न कराया। इसके चलते मरीज को इस आधुनिक तकनीक से इलाज के लिए केवल 10,000 रुपये ही खर्च करने पड़े।
मरीज की सेहत में तेजी से सुधार, जल्द मिलेगी छुट्टी
रोबोटिक सर्जरी का सबसे बड़ा फायदा मरीज की रिकवरी स्पीड में देखने को मिला है। अत्यधिक मोटापे के बावजूद न्यूनतम चीर-फाड़ वाली इस तकनीक के कारण मरीज के स्वास्थ्य में काफी तेजी से सुधार हो रहा है और डॉक्टरों के अनुसार उन्हें जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे रही डॉक्टरों की पूरी टीम
सर्जरी टीम: डॉ. अंजू अग्रवाल (नेतृत्वकर्ता), डॉ. स्मृति अग्रवाल, डॉ. शालिनी सिंह, डॉ. अनन्या, डॉ. शाम्भवी, सिस्टर नीथा और मनीष।
एनेस्थीसिया टीम: डॉ. विनीता, डॉ. नीलकमल, डॉ. निधि सिंह और डॉ. गोविंद अग्रवाल।
केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने इस बड़ी उपलब्धि पर पूरी मेडिकल और एनेस्थीसिया टीम को बधाई दी।











