स्वास्थ्य विभाग ने जारी की नई गाइडलाइन
लखनऊ। राजधानी में रविवार को इन्फ्लुएंस-ए (एच1एन1) के 7 नए मरीज दर्ज किए गए हैं। इनमें से 3 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि 4 मरीज होम आइसोलेशन में हैं। राहत की बात यह है कि अस्पताल में भर्ती पूर्व मरीजों में से 1 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुका है। वर्तमान में जनपद में कुल एक्टिव मामलों की संख्या 66 पहुंच गई है।
स्वास्थ्य विभाग और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. एन.बी. सिंह ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय से प्राप्त निर्देशों के आधार पर मरीजों की स्थिति और जांच को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है।
गंभीर श्रेणी के मरीजों की पहचान और जांच के कड़े निर्देश
मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अनुसार, मरीजों को लक्षणों की गंभीरता के आधार पर दो वर्गों में वर्गीकृत किया गया है:
गंभीर श्रेणी (Real-Time RT-PCR अनिवार्य): तेज बुखार के साथ सीने में दर्द, बेहोशी, ब्लड प्रेशर कम होना, सांस फूलना, नाखूनों का नीला पड़ना या बलगम में खून आने जैसे लक्षणों वाले मरीजों की तुरंत ‘रियल टाइम आरटी-पीसीआर’ जांच कराई जाएगी और आवश्यकतानुसार अस्पताल में भर्ती किया जाएगा।
बच्चों के लिए रेड फ्लैग संकेत: बच्चों में अत्यधिक सुस्ती (उनींदापन), लगातार तेज बुखार, खान-पान न ले पाना, झटके आना या तेज सांस चलना गंभीर लक्षण माने जाएंगे।
पुरानी बीमारी वाले मरीज: यदि किसी मरीज की पहले से मौजूद कोई गंभीर बीमारी बिगड़ने लगती है, तो उन्हें भी तत्काल गंभीर श्रेणी में रखकर आपातकालीन चिकित्सकीय सहायता दी जाएगी।
सामान्य लक्षण वाले मरीजों को होम आइसोलेशन की सलाह
बुखार, जुकाम, गले में खराश और खांसी जैसे सामान्य लक्षण वाले मरीजों को पैनिक न करने की सलाह दी गई है।
जांच की जरूरत नहीं: सामान्य लक्षण वाले मरीजों को आरटी-पीसीआर टेस्ट की आवश्यकता नहीं है।
घरेलू देखभाल: ऐसे मरीजों को घर पर रहकर पर्याप्त आराम करने, नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से चिकित्सकीय परामर्श लेने और परिवार से अलग रहने की सलाह दी गई है।
उच्च जोखिम वाले समूहों से दूरी बनाना अनिवार्य
स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण के प्रति संवेदनशील समूहों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया है। इन्फ्लुएंजा के मरीजों को निम्नलिखित लोगों के संपर्क में आने से बचने की सख्त हिदायत दी गई है:
छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाएं
65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग
डायबिटीज, रक्त एवं तंत्रिका विकार (Neurological Disorders) या अन्य पुरानी बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति
अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण और सेफ्टी प्रोटोकॉल लागू
संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए अस्पतालों को कड़े मानक अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में मरीजों की प्रॉपर स्क्रीनिंग की जा रही है और आवश्यकतानुसार अलग वार्डों की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, स्वास्थ्यकर्मियों के बचाव के लिए पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) के उपयोग को अनिवार्य किया गया है।
क्या करें और क्या न करें: बचाव के मुख्य उपाय
क्या करें:
लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर से परामर्श लें।
खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रुमाल या टिशू से ढकें।
पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें और घर पर विश्राम करें।
हाथों को साबुन और पानी से बार-बार धोएं या सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
क्या न करें:
बिना डॉक्टरी सलाह के खुद से दवाइयां (Over-the-counter medicines) न लें।
भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से बचें और आंखों, नाक व मुंह को बार-बार न छुएं।











