PGI : बिना चीरा और बिना जनरल एनेस्थीसिया के पैराथायरॉइड एडेनोमा का सफल माइक्रोवेव एब्लेशन

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​लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के डॉक्टरों की एक बहु-विषयक (Multidisciplinary) टीम ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। संस्थान में 60 वर्षीय एक पुरुष मरीज के पैराथायरॉइड एडेनोमा का अल्ट्रासाउंड-गाइडेड माइक्रोवेव एब्लेशन (MWA) बिना किसी सर्जिकल चीरे और बिना जनरल एनेस्थीसिया के सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।
​अत्याधुनिक तकनीक से बिना निशान का इलाज
​मरीज प्राइमरी हाइपर पैराथायरॉइडिज्म की समस्या से पीड़ित था, जिसके कारण उसके रक्त में कैल्शियम का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ था। विस्तृत जांच में पाया गया कि मरीज की बाईं ओर की निचली पैराथायरॉइड ग्रंथि में एडेनोमा (Left Inferior Parathyroid Adenoma) है।

​परंपरागत ओपन सर्जरी के बजाय डॉक्टरों ने आधुनिक और न्यूनतम इनवेसिव विधि ‘माइक्रोवेव एब्लेशन’ को चुना। इस प्रक्रिया को केवल लोकल एनेस्थीसिया देकर अंजाम दिया गया। इस अत्याधुनिक तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि मरीज की गर्दन पर न तो कोई चीरा लगाया गया और न ही इलाज के बाद त्वचा पर कोई निशान छूटा।
​महज 8 घंटे में मरीज को मिली छुट्टी
​न्यूनतम चीर-फाड़ वाली इस प्रक्रिया के बाद मरीज की सेहत में तेजी से सुधार देखा गया। उसकी स्थिति पूरी तरह संतोषजनक पाए जाने के बाद उसे प्रक्रिया के महज 8 घंटे के भीतर अस्पताल से सुरक्षित छुट्टी दे दी गई। विशेषज्ञों के अनुसार, सही मरीजों के चयन के साथ इमेज-गाइडेड माइक्रोवेव एब्लेशन एक बेहद प्रभावी उपचार विकल्प साबित हो रहा है।

इसके मुख्य फायदों में शामिल हैं:
​लोकल एनेस्थीसिया में उपचार होने से जोखिम की कमी
​बिना चीरे और निशान रहित इलाज
​तेज रिकवरी और अस्पताल में रुकने के समय (Hospital Stay) में भारी कमी
​मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम का संयुक्त प्रयास
​इस जटिल और उन्नत प्रक्रिया को प्रो. सबरेत्नम एम., प्रो. रजनीकांत (इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी), डॉ. मिथुन राम, डॉ. मिथलेश वांचू, डॉ. मीनाक्षी सुहालका, डॉ. फिरदौस, डॉ. शिखर अग्रवाल, डॉ. सईदुर रहमान और नर्सिंग ऑफिसर श्रीमती कौशल की टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इसके अलावा एंडोक्राइनोलॉजी विभाग से डॉ. अंबिका टंडन और डॉ. अमन बंसल ने मरीज के एंडोक्राइन मूल्यांकन और चिकित्सीय प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई।

​sgpgi के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर. के. धीमन ने इस सफलता पर पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बिना निशान वाली यह तकनीक संस्थान की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

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