PGI : कैंसर पीड़ित दो नन्हे मासूमों की जटिल सर्जरी कर विशेषज्ञों ने दिया नया जीवन

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हृदय तक फैले किडनी कैंसर और पैंक्रियाज ट्यूमर की जटिल सर्जरी सफल


​लखनऊ। सितंबर में मनाए जा रहे ‘बाल कैंसर जागरूकता माह’ के दौरान संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और मिसाल कायम की है। संस्थान के पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपरस्पेशियलिटीज विभाग की बहुविषय विशेषज्ञ टीम ने कैंसर से जूझ रहे दो छोटे बच्चों की अत्यंत जटिल एवं जोखिमभरी सर्जरी कर उन्हें नया जीवन प्रदान किया है।
​केस 1: हृदय तक पहुंचे ट्यूमर थ्रोम्बस को निकाला
बिहार की रहने वाली ढाई वर्ष की मासूम को पेट में बड़ी गांठ के कारण संस्थान लाया गया था। जांच में पता चला कि बच्ची की दाहिनी किडनी में ‘विल्म्स ट्यूमर’ (किडनी कैंसर) है। बीमारी इतनी गंभीर हो चुकी थी कि ट्यूमर शरीर की मुख्य नस (IVC) के जरिए आगे बढ़ते हुए दिल के दाहिने हिस्से (राइट एट्रियम) तक फैल गया था।

​इलाज प्रक्रिया: बच्ची को पहले 9 साइकल कीमोथेरेपी दी गई। इसके बाद पीडियाट्रिक सर्जरी, कार्डियोथोरेसिक (CTVS) और एनेस्थीसिया विभाग ने रणनीति बनाई।
​सर्जरी: ‘कार्डियोपल्मोनरी बाईपास’ (हार्ट-लंग मशीन) की मदद से ऑपरेशन किया गया। डॉक्टरों ने ट्यूमर से प्रभावित किडनी और यूरेटर के साथ दिल के अंदर तक फैले ट्यूमर थ्रोम्बस को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया।

​केस 2: 4 साल के बच्चे की दुर्लभ व्हिपल सर्जरी
शाहजहांपुर के 4 वर्षीय बालक को पेट में दर्द और बुखार की समस्या थी। जांच में पैंक्रियाज के सिर पर एक बड़ा ट्यूमर मिला, जो छोटी आंत (ड्यूओडेनम) और मुख्य पित्त नली को नुकसान पहुंचा रहा था। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी (Upfront Surgery) का फैसला किया।
​जटिल प्रक्रिया: बच्चे की अति-जटिल ‘व्हिपल सर्जरी’ (Pancreaticoduodenectomy) की गई। इसमें ट्यूमर से प्रभावित पैंक्रियाज का हिस्सा, ड्यूओडेनम और पित्त की नली निकाली गई।
​पुनर्निर्माण: इसके बाद पाचन तंत्र को सुचारू करने के लिए जटिल रिकंस्ट्रक्शन किया गया।

दोनों सफल ऑपरेशन पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपरस्पेशियलिटीज के विभागाध्यक्ष प्रो. बसंत कुमार के नेतृत्व में हुए। सर्जिकल टीम में प्रो. बसंत कुमार, प्रो. अंकुर मंडेलिया, डॉ. अंजू वर्मा, डॉ. तरुण कुमार (पीडियाट्रिक सर्जरी) तथा प्रो. शांतनु पांडे व डॉ. अरीब खान (CTVS) शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम से डॉ. आशीष कन्नौजिया, डॉ. पल्लव सिंह व डॉ. कोमल पासवान ने मुख्य भूमिका निभाई।
​विशेषज्ञों की अपील: लक्षणों को न करें नजरअंदाज
प्रो. बसंत कुमार ने बताया कि बच्चों के पेट में बिना कारण गांठ या सूजन, लंबे समय तक तेज बुखार, लगातार वजन गिरना और कमजोरी जैसे लक्षणों को हल्के में न लें। समय पर पहचान और विशेषज्ञ केंद्र में रेफरल से बाल कैंसर का सटीक इलाज संभव है।

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