KGMU: क्वीन मेरी हॉस्पिटल में कोविड काल के बाद पहली IVF डिलीवरी, गूंजी किलकारी

0
52

दम्पति का 15 साल का लंबा इंतजार खत्म

​लखनऊ । किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के क्वीन मैरी हॉस्पिटल ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। अस्पताल की IVF यूनिट में कोविड महामारी के बाद पहला सफल प्रसव 20 सितंबर 2026 को कराया गया। 15 वर्षों से संतान सुख से वंचित एक दंपति के घर नन्ही परी के आगमन से खुशियों का माहौल है।

​15 वर्षों का संघर्ष और डॉक्टरों का प्रयास
​38 वर्षीय संतोष कुमार पिछले 15 सालों से बांझपन (Infertility) की समस्या का सामना कर रही थीं। कई जगह इलाज कराने के बाद भी सफलता न मिलने पर, लगभग एक वर्ष पूर्व उन्होंने क्वीन मैरी हॉस्पिटल की Infertility/IVF यूनिट में संपर्क किया।

​यूनिट हेड प्रोफेसर पुष्पलता संखवार के निर्देशन और देखरेख में मरीज की विस्तृत जांच की गई। इसके बाद आवश्यक उपचार और आधुनिक IVF प्रक्रिया के जरिए उन्होंने गर्भधारण किया। पूरी गर्भावस्था के दौरान डॉक्टरों की टीम ने उनका विशेष ध्यान रखा और नियमित फॉलो-अप किया।
​मां और नवजात बच्ची दोनों स्वस्थ
​रविवार (20 सितंबर) को सर्जिकल टीम ने सीजेरियन सेक्शन के जरिए सफल प्रसव कराया। संतोष कुमार ने 2 किलोग्राम वजन की एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। डॉक्टरों के अनुसार, जन्म के तुरंत बाद नवजात का रोना उसके पूर्णतः स्वस्थ होने का संकेत है। वर्तमान में मां और बच्चे दोनों की स्थिति बिल्कुल सामान्य और संतोषजनक है।

​कोविड के बाद बंद हुई सेवा फिर से शुरू
​इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल ने कहा:
​”यह क्वीन मैरी हॉस्पिटल और पूरे KGMU परिवार के लिए एक गर्व का क्षण है। कोविड काल से पहले भी हमारे यहां IVF से सफल प्रसव होते रहे हैं, लेकिन महामारी के कारण यह सुविधा अस्थायी रूप से बंद हो गई थी। अब इसे पुनः सफलता के साथ संचालित कर दिया गया है।”

​आधुनिक तकनीकों से जगी नई उम्मीद
​डॉ. अग्रवाल ने आगे बताया कि अस्पताल की IVF/Infertility यूनिट भविष्य में भी निःसंतान दंपतियों को उच्चस्तरीय इलाज मुहैया कराती रहेगी। अब यहां IVF, ICSI और TESE जैसी आधुनिक असिस्टेड रिप्रोडक्टिव तकनीकों (Assisted Reproductive Techniques) के माध्यम से बांझपन का सटीक इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।

​उचित जांच, व्यक्तिगत उपचार योजना और विशेषज्ञों की देखरेख से बरसों से संतान सुख की प्रतीक्षा कर रहे दंपतियों के लिए यह सेंटर एक नई किरण साबित हो रहा है।

Previous articleआयुर्वेद स्वस्थ एवं निरोगी जीवन की आधारशिला:ब्रजेश पाठक
Next articleपितृ पक्ष : 26 सितंबर से होगी शुरुआत, जानें श्राद्ध की प्रमुख तिथियां, मुहूर्त और धार्मिक महत्व

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here