पितृ पक्ष : 26 सितंबर से होगी शुरुआत, जानें श्राद्ध की प्रमुख तिथियां, मुहूर्त और धार्मिक महत्व

0
53

​लखनऊ। सनातन धर्म में पितरों की आत्मा की शांति और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का महापर्व ‘पितृ पक्ष’ इस वर्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा। भाद्रपद मास की पूर्णिमा से आरंभ होकर अश्विन मास की अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक चलने वाले इस 16 दिवसीय पखवाड़े में पूर्वजों का स्मरण कर उनके निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं।

​पितृ पक्ष का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष की अवधि में पूर्वज स्वर्गलोक से धरती पर आते हैं और किसी न किसी रूप में अपने परिजनों के घर पधारते हैं। इस दौरान यदि पूरी श्रद्धा से तर्पण, पिंडदान, पूजा-पाठ और स्नान-दान जैसे पुण्य कार्य किए जाएं, तो पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।

​स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र (अलीगंज) के ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल के अनुसार, पितृ पक्ष में श्राद्ध करने से साधक को ‘पितृ दोष’ और ‘पितृ ऋण’ से मुक्ति मिलती है तथा घर में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है।
​श्राद्ध कर्म के लिए शुभ मुहूर्त (कुतुप व अपराह्न काल)
​श्राद्ध अनुष्ठान हमेशा दोपहर के समय शुभ मुहूर्त में ही संपन्न किया जाना चाहिए।

इस वर्ष श्राद्ध के लिए मुख्य मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे:
​कुतुप मुहूर्त: दोपहर 11:33 बजे से 12:21 बजे तक
​रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:21 बजे से 01:09 बजे तक
​अपराह्न काल: दोपहर 01:09 बजे से 03:33 बजे तक
​शास्त्रों के अनुसार अपराह्न काल में किया गया श्राद्ध पितर सहर्ष स्वीकार करते हैं।
​श्राद्ध की मुख्य तिथियां (काशी पंचांग के अनुसार)तिथिदिनश्राद्ध का नाम
26 सितंबरशनिवारपूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबररविवारप्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबरसोमवारद्वितीया श्राद्ध
29 सितंबरमंगलवारतृतीया श्राद्ध
30 सितंबरबुधवारचतुर्थी श्राद्ध
1 अक्टूबरगुरुवारपंचमी श्राद्ध
2 अक्टूबरशुक्रवारषष्ठी एवं सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबरशनिवारअष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबररविवारनवमी श्राद्ध
5 अक्टूबरसोमवारदशमी श्राद्ध
6 अक्टूबरमंगलवारएकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबरबुधवारद्वादशी श्राद्ध
8 अक्टूबरगुरुवारत्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबरशुक्रवारचतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबरशनिवारसर्वपितृ अमावस्या (विसर्जन)

श्राद्ध में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
​पूर्वज जिस तिथि को देवलोकगमन किए हों, उसी तिथि पर उनके नाम से श्रद्धापूर्वक योग्य ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। इसके साथ ही भोजन का एक अंश गाय, कौए, कुत्ते और चींटियों (पंचबलि) के लिए अवश्य निकालना चाहिए।
​यदि परिजनों को अपने पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, तो वे 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन उनका श्राद्ध, दान और तर्पण कर सकते हैं। इस दिन सभी पितरों का विसर्जन होता है।

Previous articleKGMU: क्वीन मेरी हॉस्पिटल में कोविड काल के बाद पहली IVF डिलीवरी, गूंजी किलकारी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here