बृहस्पति ग्रह का 12 वर्ष बाद उच्च राशि कर्क में गोचर 2 जून से

0
36

बारह राशियों में यह होगा परिवर्तन

लखनऊ।बृहस्पति (गुरु) नवग्रहों में सबसे शुभ ग्रह है। “देवगुरु” जो — धर्म, ज्ञान, विवाह, संतान, भाग्य और समृद्धि के कारक है बृहस्पति अपनी दृष्टि से कुंडली के जिस भाव को भी देख लेते हैं, उसके प्रभाव को बढ़ा देते हैं और उसके लिए सुख-संपत्ति के द्वार खोल देते हैं। बृहस्पति को संतान, विवाह, धन-संपत्ति और ज्ञान का कारक ग्रह माना जाता है। गुरु बृहस्पति का कर्क राशि में गोचर 2 जून को प्रातः 6:30 बजे होगा।

स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज के ज्योतिषाचार्य-एस.एस.नागपाल ने बताया बृहस्पति कर्क राशि में 31 अक्टूबर की संध्या 19:19 बजे तक रहेंगे और उसके बाद सूर्य के आधिपत्य वाली सिंह राशि में प्रवेश कर जाएंगे। गुरु के कर्क राशि में आने पर हंस राजयोग भी बनता है जो पंच महापुरुष राजयोग में से एक राजयोग है। यह 12 साल बाद बनने वाला शक्तिशाली राजयोग है इस बार गुरु अतिचारी (तेज गति) में रहेंगे। इसका मतलब है कि बदलाव बहुत तेजी से और तीव्रता के साथ होंगे। गुरु कर्क गोचर में विवाह, संतान, उच्च शिक्षा, व्यापार, संपत्ति, धार्मिक यात्रा, निवेश हेतु महत्वपूर्ण समय है जिनकी कुंडली में गुरु 6वें, 8वें या 12वें भाव में हैं, उन्हें सेहत और खर्चों पर थोड़ा नियंत्रण रखना चाहिए।

गुरु कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, कुछ समय के लिए आर्थिक स्थिरता, सरकारी कल्याण योजनाओं, कृषि और रियल एस्टेट क्षेत्र में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

गुरु के उच्च राशि अनुसार प्रभाव –
मेष राशि- गुरु चतुर्थ भाव में उत्तम— गृह सुख, माता का स्वास्थ्य, संपत्ति में वृद्धि। मकान खरीदने का अच्छा समय। मानसिक शांति मिलेगी
वृषभ राशि – गुरु तृतीय भाव में — पराक्रम, यात्रा, मीडिया और लेखन क्षेत्र में अवसर। भाई-बहन से मतभेद संभव। उद्यम में सतर्कता रखें।
मिथुन राशि – गुरु द्वितीय भाव में — धन वृद्धि, परिवार में खुशी, वाणी से लाभ। वर्ष के उत्तरार्ध में आर्थिक सुधार निश्चित।
कर्क राशि- गुरु स्वयं लग्न में, उच्च के अत्युत्तम— जन्म-जन्मान्तर का पुण्य फलेगा। विवाह, व्यापार, संतान, स्वास्थ्य — सभी में अभूतपूर्व उन्नति। यह आपके जीवन का स्वर्णिम काल हो सकता है
सिंह राशि- गुरु द्वादश भाव में — खर्च बढ़ेगा पर आध्यात्मिक लाभ और विदेश से अवसर मिलेंगे। विदेश यात्रा या बसने के योग। मोक्ष की दिशा में प्रवृत्ति
कन्या राशि – गुरु एकादश भाव में — बड़ी इच्छाएं पूरी होंगी, आर्थिक लाभ। विवाह के लिए भी अनुकूल। वर्ष का उत्तरार्ध उत्तम।
तुला राशि – गुरु दशम भाव में — करियर में बड़ा अवसर, नाम-प्रतिष्ठा, पदोन्नति। व्यापार में विस्तार। राजनीति में जाने वालों के लिए सर्वोत्तम।
वृश्चिक राशि – गुरु नवम भाव में — भाग्यशाली गोचर! भाग्योदय, विवाह, विदेश यात्रा, पिता से संपत्ति। यह आपके जीवन का सर्वश्रेष्ठ वर्ष बन सकता है
धनु राशि – अष्टम भाव में — गुरु अपनी ही राशि से पंचमेश होकर कर्क में — संतान, बुद्धि और भाग्य का अभूतपूर्व विकास। विरासत या बीमा से लाभ। आध्यात्मिक सिद्धि का काल।
मकर राशि – सप्तम भाव में — विवाह के शुभ योग, जीवनसाथी से सुख, व्यापार साझेदारी में लाभ। संबंधों में सुधार।
कुंभ राशि – गुरु षष्ठ भाव में — प्रतिस्पर्धा पर विजय, ऋण से मुक्ति। चिकित्सा, कानून क्षेत्र में सफलता। थोड़ी स्वास्थ्य सतर्कता बनाए रखें।
मीन राशि- पंचम भाव में — गुरु स्वयं मीन राशि के स्वामी हैं और पंचम भाव में — यह “गज केसरी जैसा” अद्भुत योग है। संतान, प्रेम, शिक्षा, सट्टे-निवेश — सब में सफलता। जीवन का स्वर्णिम काल।

गुरु ग्रह के अनुकूल प्रभाव को और बढ़ाने और प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए ये उपाय करें- विष्णु सहस्रनाम का प्रतिदिन पाठ करें, केसर/ हल्दी का तिलक करे, पीले वस्त्र पहनें, पीली वस्तुएं दान करें, गाय को केला खिलाये, पीली मिठाई का दान करें, विष्णु मंदिर में दर्शन करें, बृहपति के मंत्रो का जाप करे, पीपल/ केले के वृक्ष में हल्दी मिला जल अर्पित करें, गुरु, पिता और घर के बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करें और उनका आशीर्वाद ले, सात्विक भोजन करे।

Previous articleएक वर्ष में सशक्त हुई कानून व्यवस्था, सुरक्षा और तकनीकी पुलिसिंग: डीजीपी
Next articleविश्व पर्यावरण दिवस पर FICCI FLO करेगा पैनल चर्चा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here