एक वर्ष में सशक्त हुई कानून व्यवस्था, सुरक्षा और तकनीकी पुलिसिंग: डीजीपी

0
42

जीरो टॉलरेंस, मिशन शक्ति और साइबर सुरक्षा के माध्यम से यूपी पुलिस ने दर्ज की उल्लेखनीय उपलब्धियां

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में अपने एक वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों और आगामी प्राथमिकताओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में प्रदेश पुलिस ने बीते एक वर्ष के दौरान नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण तथा पुलिस कल्याण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।

डीजीपी ने बताया कि पुलिस ने निर्धारित 10 प्रमुख प्राथमिकताओं पर कार्य करते हुए अपराध एवं अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों की तुलना में प्रदेश में अपराध की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है तथा कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।

पुलिस कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया तथा दहेज, घरेलू हिंसा और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाई गई। छेड़छाड़ एवं महिला उत्पीड़न के मामलों में कार्रवाई के बाद भी पीड़िताओं से नियमित संपर्क बनाए रखने की व्यवस्था लागू की गई है।

साइबर अपराध के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश पुलिस की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए डीजीपी ने बताया कि कोविड काल के बाद साइबर अपराधों में वृद्धि हुई, जिसके मद्देनजर व्यापक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गए। अब तक 62 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को साइबर अपराधों की रोकथाम एवं जांच का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। साइबर ठगी से संबंधित लगभग 450 करोड़ रुपये की धनराशि को फ्रीज कराया गया है, जो देश में सर्वाधिक है।
उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीकों का उपयोग कर अपराधियों की पहचान और निगरानी की जा रही है। फेस रिकग्निशन एवं अन्य आधुनिक तकनीकों की सहायता से फरार अपराधियों की गिरफ्तारी में सफलता मिली है।

डीजीपी ने बताया कि बैंक ऑफ बड़ौदा के सहयोग से दुर्घटना अथवा ड्यूटी के दौरान शहीद हुए पुलिस कर्मियों के परिवारों को लगभग 137 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। पुलिसकर्मियों को बीमा सुरक्षा, निःशुल्क चिकित्सा सुविधाएं तथा छात्रावास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

सड़क सुरक्षा के विषय में उन्होंने कहा कि दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर विशेष सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। जिलों में जिला अधिकारियों की अध्यक्षता में समितियां कार्य कर रही हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।
डीजीपी ने कहा कि न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से समयबद्ध विवेचना, ई-साक्ष्य, ई-समन तथा तकनीकी आधारित प्रक्रियाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 90 प्रतिशत मामलों में ई-समन व्यवस्था लागू की जा चुकी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठित अपराध, माफिया नेटवर्क तथा उनसे जुड़े श्वेतपोश अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। साथ ही आतंकवाद के बदलते स्वरूप और सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को गुमराह करने की कोशिशों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

Previous articleअखिल विश्व गायत्री परिवार का एक दिवसीय ‘बाल संस्कारशाला समर कैंप’ का आयोजन

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here