अटल बिहारी चिविवि में डाक्टरों को अधिक वेतन दिये जाने की जांच पूरी

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लखनऊ। अटल बिहारी वाजपेई मेडिकल यूनिवर्सिटी में डॉक्टरों को अधिक वेतन दिए जाने के मामले की जांच पूरी हो गई है। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट कुलपति डॉ. अमित देवगन को सौंप दी, जिसके बाद इसे शासन को भेज दिया गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी में कार्यरत डॉक्टरों और अधिकारियों के बीच हलचल तेज हो गई है।

 

 

 

 

 

 

 

 

गौरतलब है कि प्रदेश के मेडिकल, डेंटल, पैरामेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों को संबद्धता देने के उद्देश्य से इस विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। वर्तमान में इसके अंतर्गत 279 नर्सिंग, 65 मेडिकल, 16 डेंटल और 47 पैरामेडिकल कॉलेज जुड़े हुए हैं।
यह मामला तब सामने आया जब समाजसेवी राज मोहन सक्सेना ने मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक सहित शासन को शिकायत भेजी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अन्य संस्थानों से प्रतिनियुक्ति पर आए डॉक्टरों को विभिन्न विभागों में डीन बनाकर उनके वेतन में भारी बढ़ोतरी की गई।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

जहां पहले ये डॉक्टर अपने मूल संस्थानों में लगभग 2.5 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन पा रहे थे, वहीं यूनिवर्सिटी में उन्हें करीब 4.5 लाख रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं।

 

 

 

 

 

 

शासन ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए। कुलपति के निर्देश पर जांच कराई गई और 18 अप्रैल को रिपोर्ट चिकित्सा शिक्षा विभाग को सौंप दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिनियुक्ति पर तैनात डॉक्टरों और अधिकारियों को किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के समान वेतन और भत्ते दिए जा रहे हैं। हालांकि, विश्वविद्यालय से जुड़े शासनादेशों में इस तरह की परिलब्धियों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इसके बावजूद, तत्कालीन कुलपति की मंजूरी के आधार पर केजीएमयू से संबंधित शासनादेशों का हवाला देते हुए वेतन और भत्तों का भुगतान किया गया।

 

 

 

 

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