लखनऊ। महिलाओं में गर्भाशय की अंदरूनी परत से जुड़े एंडोमेट्रियल कैंसर को लेकर शनिवार को कल्याण सिंह कैंसर संस्थान के प्रेक्षागृह में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि यदि शरीर में होने वाले बदलावों और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न किया जाए, तो समय रहते इस बीमारी पर पूरी तरह काबू पाया जा सकता है।
संस्थान के रेडियोथेरेपी विभाग के अध्यक्ष डॉ. शरद सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि एंडोमेट्रियल कैंसर की पहचान यदि शुरुआती चरण (Early Stage) में हो जाए, तो इलाज बेहद प्रभावी होता है। इससे मरीजों के ठीक होने की संभावना और उनके जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) में काफी सुधार आता है।
उन्होंने महिलाओं को सचेत करते हुए कहा कि निम्नलिखित असामान्य लक्षणों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए:
मासिक धर्म (Menopause) बंद होने के बाद दोबारा ब्लीडिंग होना।
असामान्य रूप से बहुत ज्यादा रक्तस्राव (Heavy Bleeding) होना।
पेट के निचले हिस्से (Pelvic Area) में लगातार दर्द रहना।
⚖️ मोटापा और हार्मोनल असंतुलन बढ़ाते हैं खतरा: डॉ. रूमिता सिंह
रेडियोथेरेपी विभाग की डॉ. रूमिता सिंह ने एंडोमेट्रियल कैंसर के मुख्य कारणों और इसकी पहचान पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि इस कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:
मोटापा (Obesity)
शरीर में हार्मोन का असंतुलन
बढ़ती उम्र और कुछ अन्य चिकित्सीय स्थितियां
डॉ. रूमिता ने महिलाओं को सलाह दी कि वे अपने शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों पर भी बारीकी से ध्यान दें और नियमित रूप से अपनी स्वास्थ्य जांच (Routine Check-up) करवाती रहें।
🎯 इलाज की नई तकनीक और क्लीनिकल ट्रायल
”आज के समय में आधुनिक दवाओं, सफल ऑपरेशन (Surgery) और एडवांस रेडियोथेरेपी के जरिए एंडोमेट्रियल कैंसर का सटीक इलाज मुमकिन है। चिकित्सा क्षेत्र में आई नई तकनीकों ने अब उपचार की राह को बहुत आसान और सुरक्षित बना दिया है।— डॉ. सौम्या गुप्ता
वहीं, डॉ. अभिषेक तिवारी ने कहा कि गंभीर स्थिति वाले मरीजों में चल रहे नए क्लीनिकल ट्रायल और उनसे मिल रहे सकारात्मक उपचार परिणामों (Treatment Outcomes) पर अपनी रिपोर्ट साझा की।
🔑 जागरूकता ही है सबसे बड़ा बचाव
कार्यक्रम के समापन पर गायनी आंकोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. सबूही कुरैशी ने मुख्य संदेश देते हुए कहा कि इस बीमारी से लड़ने का सिर्फ एक ही अचूक मंत्र है—”सही समय पर जागरूकता, तुरंत जांच और बिना देरी किए सही इलाज।” यही इस गंभीर बीमारी से बचाव की सबसे बड़ी कुंजी है।












