डॉ. देविशा अग्रवाल को मिली प्रतिष्ठित अमेरिकी ‘इंटरनेशनल विजिटिंग स्कॉलरशिप’

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​बड़ी उपलब्धि: अमेरिकन एकेडमी ऑफ ओटोलैरिंजोलॉजी-हेड एंड नेक सर्जरी फाउंडेशन द्वारा हुआ चयन।
​ग्लोबल एक्सपोजर: हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में लेंगी एडवांस क्लिनिकल ऑब्जर्वरशिप का प्रशिक्षण।
​गर्व का क्षण: दुनिया भर के ईएनटी विशेषज्ञों के कड़े मुकाबले के बीच हासिल किया मुकाम।

​लखनऊ। राजधानी लखनऊ की जानी-मानी ईएनटी एवं फेशियल प्लास्टिक सर्जन डॉ. देविशा अग्रवाल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शहर का नाम रोशन किया है। डॉ. देविशा का चयन वर्ष 2026 की प्रतिष्ठित ‘इंटरनेशनल विजिटिंग स्कॉलरशिप’ (IVS) के लिए किया गया है। यह स्कॉलरशिप ‘अमेरिकन एकेडमी ऑफ ओटोलैरिंजोलॉजी-हेड एंड नेक सर्जरी फाउंडेशन’ (AAO-HNSF) द्वारा प्रदान की जाती है।
​कड़े वैश्विक मुकाबले में मारी बाजी
​डॉ. देविशा ने बताया कि इस स्कॉलरशिप को पाने के लिए दुनिया भर के ईएनटी (ENT) विशेषज्ञों के बीच बेहद कड़ा मुकाबला था। चयन समिति ने उनके बेहतरीन शैक्षणिक रिकॉर्ड, शोध कार्य, नेतृत्व क्षमता और चिकित्सा के क्षेत्र में दिए गए योगदान को आधार बनाते हुए इस फेलोशिप के लिए उनके नाम पर मुहर लगाई।

​अमेरिका में लेंगी एडवांस ट्रेनिंग, मिलेंगी ये सुविधाएं
​लॉस एंजिलिस दौरा: डॉ. देविशा अमेरिका के लॉस एंजिलिस में आयोजित होने वाली AAO-HNSF 2026 की वार्षिक बैठक में हिस्सा लेंगी।
​हार्वर्ड में ऑब्जर्वरशिप: वह ‘मैसाचुसेट्स आई एंड ईयर, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल’ में एडवांस क्लिनिकल ऑब्जर्वरशिप करेंगी, जहाँ वह राइनोलॉजी, फेशियल प्लास्टिक सर्जरी और ईएनटी की अत्याधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण लेंगी।
​विशेष लाभ: इस स्कॉलरशिप के तहत उन्हें यात्रा अनुदान (Travel Grant), सम्मेलन में मुफ्त पंजीकरण और अमेरिकन एकेडमी की मानद सदस्यता भी दी जाएगी।
​उपलब्धियों से भरा रहा है करियर

​डॉ. देविशा के नाम पहले भी कई बड़े रिकॉर्ड दर्ज हैं:
​वह ‘अमेरिकन राइनोलॉजिक सोसाइटी ग्लोबल स्कॉलर अवॉर्ड’ पाने वाली पहली भारतीय डॉक्टर हैं।
​वर्ष 2025 में उन्होंने दुनिया की मशहूर जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन से फेशियल प्लास्टिक सर्जरी में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया था।
​वर्तमान में वह एक निजी मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।

​डॉ. देविशा का संकल्प:
“अमेरिका से मिलने वाले इस आधुनिक ज्ञान और उन्नत तकनीकों का उपयोग मैं भारत वापस आकर यहाँ के मरीजों के बेहतर इलाज और देश में चिकित्सा अनुसंधान (Medical Research) को बढ़ावा देने में करूँगी।”

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