शरीर से जुड़ी इस समस्या के कारण बढ़ रहा कार्डियक डिजीज

0
185

 

 

 

 

 

 

 

लखनऊ। मोटापा अब केवल शरीर से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि कई डिजीज का कारण बनता जा रहा है। अधिक वजन वाले लोगों में हार्ट का  खतरा काफी बढ़ जाता है। मोटे लोगों को हार्ट अटैक की  संभावना दुबले-पतले लोगों की तुलना में कहीं ज्यादा होती है। यह  बात लोहिया संस्थान में कॉर्डियोलॉजी विभाग प्रमुख वरिष्ठ डॉ. भुवन चन्द्र तिवारी ने शनिवार को अटल बिहारी वाजपेई चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया (सीएसआई) की कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए दी।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

डॉ. तिवारी ने बताया कि शरीर में एस्ट्रा फैट जमा होने से कोलेस्ट्रॉल और बीपी बढ़ने लगता है, जिससे  हार्ट  पर प्रेशर पड़ता है। यही नहीं मोटापा डायबिटीज का भी प्रमुख कारण बनता है। सही  डाइट,नियमित एक्सरसाइज और वजन नियंत्रण से इन खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग के डॉ. गौरव चौधरी ने बताया कि तेज आवाजें शरीर में तनाव (स्ट्रेस) को बढ़ाती हैं। जिससे ब्लड प्रेशर में वृद्धि होती है।पीजीआई के डॉ. आदित्य कपूर ने बताया कि यदि सीने में दर्द, सांस फूलना, थकान या धड़कन अनियमित लगे। तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 30 साल की उम्र के बाद नियमित दिल की सेहत की जांच करानी चाहिए।

 

 

 

 

 

 

लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग के डॉ. शरद चन्द्रा ने बताया कार्डियक मरीज को हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज जैसे ओट्स, दलिया और दालें फायदेमंद होती हैं। अखरोट, बादाम और अलसी जैसे स्रोत ओमेगा-3 देते हैं। नमक, तला-भुना खाना, घी, मक्खन और जंक फूड से परहेज जरूरी है। चीनी और रेड मीट भी कम लें। प्रतिदिन लाइट एक्सरसाइज, वजन नियंत्रण और नियमित टेस्ट  दिल स्वस्थ रखा जा सकता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

-ईसीजी से दिल की धड़कन और इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को मापता है

-ईकोकार्डियोग्राफी में अल्ट्रासाउंड के जरिए दिल की संरचना, वाल्व और पंपिंग क्षमता की जानकारी देता है

-टीएमटी से चलते या दौड़ते समय दिल पर पड़ने वाले दबाव को मापता है, जिससे छिपी हुई समस्या सामने आ सकती है

-लिपिड प्रोफाइल में खून के नमूने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर बताता है

-डायबिटीज भी हार्ट की  बीमारियों का खतरा बढ़ाती है, इसलिए शुगर लेवल जानना जरूरी है

-एंजियोग्राफी से दिल की नसों में ब्लॉकेज का सटीक पता लगाने के लिए की जाने वाली एडवांस जांच

-सीटी कोरोनरी एंजियोग्राम नॉन-इनवेसिव तरीके से धमनियों की स्थिति देखने के लिए किया जाता है

-होल्टर मॉनिटरिंग मशीन से मरीज की 24 घंटे तक दिल की धड़कन रिकॉर्ड कर अनियमितता का पता लगाता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

Previous articlePGI : क्लीनिकल रिसर्च और स्टार्टअप को दिया जाए प्रोत्साहन
Next articleसोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न :बाल कलाकार ईशान ने ‘वशीकरणम’ में अपनी चमक बिखेरी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here