मांगें न मानने पर हजारों कार्यकर्ताओं संग आंदोलन की चेतावनी

लखनऊ। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को कमिश्नर कार्यालय का घेराव कर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक रवैये पर नाराजगी जाहिर करते हुए प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि तय सीमा के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो परसों हजारों कार्यकर्ताओं के साथ उग्र धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि वीएचपी विश्व का सबसे बड़ा हिंदू संगठन है, जो वर्षों से हिंदू समाज व संस्कृति की रक्षा के लिए कार्य कर रहा है। संगठन के लिए प्रत्येक कार्यकर्ता का सम्मान सर्वोपरि है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें:
पूर्व ज्ञापन पर कार्रवाई की मांग: 3 दिन पूर्व हजरतगंज चौराहे पर दिए गए ज्ञापन पर अब तक कोई संज्ञान न लिए जाने पर नाराजगी जताई गई और उस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई।

विश्वविद्यालय परिसर रंगदारी व तमंचा सटाने का मामला: आरोप है कि हफ्ते भर पहले विवि परिसर में आलोक मिश्रा, प्रभात सिंह, आकाश देव पाण्डेय, विनय सिंह, मार्तंड सिंह, शक्ति दुबे व 25 अन्य साथियों ने कार्यकर्ता ऋषभ सिंह को मुकदमा वापस लेने के लिए रोका। विरोध करने पर देवेंद्र, ऋषभ और अभी नामक कार्यकर्ताओं की कमर पर पिस्टल व कट्टा सटाकर धमकी दी गई। आरोपियों के खिलाफ 307 (हत्या का प्रयास) जैसी संगीन धाराओं में मामला दर्ज कर कार्रवाई की मांग की गई है।
ठाकुरगंज घटना (मुकदमा सं. 630/26): अशोक सिंहल जी की जन्मशताब्दी कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ता पर हुए जानलेवा हमले के आरोपियों पर कठोरतम कार्रवाई की मांग की गई है। पीड़ित कार्यकर्ता गंभीर हालत में ट्रामा सेंटर में भर्ती है।
दुबग्गा मामला (मुकदमा सं. 285/26): दुबग्गा थाने में दर्ज केस के बावजूद अब तक लापता हिंदू युवती की बरामदगी न होने पर रोष व्यक्त किया गया और मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की गई।
’प्रशासन की होगी जिम्मेदारी’
वीएचपी व बजरंग दल के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उक्त सभी मामलों में अतिशीघ्र न्यायसंगत व कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी।












