मिल को भूल जाए 15 मिनट साबुन से धुले और वैक्सीन लगवाएं- सुनील यादव
लखनऊ। “कुत्ते के काटने से डर नहीं लगता साहब, डर लगता है इंजेक्शन से”—यह धारणा अब पूरी तरह गलत हो चुकी है। अब रेबीज का टीका पेट में नहीं, बल्कि बेहद कम मात्रा में त्वचा के ठीक नीचे (इंट्राडर्मल) हाथों पर लगाया जाता है। विश्व रेबीज दिवस 2026 की थीम ‘स्ट्रॉन्गर टूगेदर’ (Stronger Together) के तहत आयोजित एक विशेष वेबिनार में फार्मासिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष सुनील यादव ने यह जानकारी दी।
रेबीज: कारण, प्रकार और लक्षण
रेबीज एक घातक जूनोटिक वायरल बीमारी है जो संक्रमित कुत्ते, बिल्ली, बंदर या जंगली जानवरों के काटने, खरोचने या खुले घाव/म्यूकोसा को चाटने से फैलती है। इंसानों में 99% मामले कुत्तों के कारण होते हैं।
इसके दो मुख्य प्रकार हैं:
फ्यूरियस रेबीज (Furious Rabies): इसमें अतिसक्रियता, मतिभ्रम, पानी से डर (हाइड्रोफोबिया) और हवा से डर (एरोफोबिया) जैसे लक्षण दिखते हैं।
पैरालिटिक रेबीज (Paralytic Rabies): लगभग 20% मामलों में मांसपेशियां धीरे-धीरे लकवाग्रस्त हो जाती हैं और मरीज कोमा में चला जाता है।
वायरस यदि सेंट्रल नर्वस सिस्टम (CNS) तक पहुंच जाए, तो मृत्यु दर 100% है। हालांकि, समय पर पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलेक्सिस (PEP) लेने से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है।
प्राथमिक उपचार: क्या करें और क्या न करें
कुत्ता या अन्य जानवर काट ले तो तत्काल ये कदम उठाएं:
क्या करें: घाव को तुरंत बहते पानी में साबुन या डिटर्जेंट के साथ कम से कम 15 मिनट तक धोएं ताकि लार में मौजूद वायरस साफ हो सके। इसके बाद तुरंत निकटतम सरकारी अस्पताल जाएं।
क्या न करें: घाव पर मिर्च, हल्दी या कोई अन्य पदार्थ न लगाएं और न ही उस पर पट्टी बांधें। घाव पर टांके लगाने से बचें (बहुत जरूरी होने पर इम्यूनोग्लोबुलिन देने के बाद ढीले टांके लगाए जाते हैं)।
टीकाकरण की सही समय-सारणी
उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों (PHC/CHC) में एंटी-रेबीज वैक्सीन निशुल्क उपलब्ध है।
सामान्य मामलों में (Intradermal Schedule): 0, 3, 7 और 28वें दिन दोनों हाथों के ऊपरी हिस्से में इंट्राडर्मल टीका लगाया जाता है।
इम्यूनोकंप्रोमाइज्ड मरीजों में (Intramuscular Schedule): 0, 3, 7, 14 और 28वें दिन टीका दिया जाता है।
2030 तक शून्य मौत का लक्ष्य
वैश्विक स्तर पर रेबीज से प्रतिवर्ष लगभग 59,000 मौतें होती हैं, जिनमें 40% पीड़ित 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे होते हैं। संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (SDG 3.3) के तहत वर्ष 2030 तक कुत्तों के काटने से होने वाली मौतों को शून्य करने का लक्ष्य रखा गया है। पालतू जानवरों का नियमित टीकाकरण कराएं और बच्चों को जागरूक रखें।












