लखनऊ। खर्राटों की समस्या या सोते समय सांस रुक जाना (ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया) केवल एक सामान्य आदत नहीं, बल्कि सेहत के लिए गंभीर खतरा हो सकती है। हालांकि, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने अब इसके इलाज को बेहद आसान और प्रभावी बना दिया है।
गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में इंडियन डेंटल एसोसिएशन (IDA) द्वारा आयोजित 8वें डेंटल शो के दौरान विशेषज्ञों ने स्लीप एपनिया और दंत चिकित्सा में एआई (AI) के बढ़ते इस्तेमाल पर नई जानकारियां साझा कीं।
बिना बड़े ऑपरेशन के मिलेगा स्लीप एपनिया से छुटकारा
कार्यक्रम में IDA की वरिष्ठ सदस्य डॉ. नमिता शुक्ला ने बताया कि ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया में सोते समय गले की मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं, जिससे सांस की नली संकरी या बंद हो जाती है। इसके कारण मरीज की सांस बार-बार कुछ सेकंड के लिए रुकती है और नींद टूटती है।
स्वास्थ्य जोखिम: लंबे समय तक इलाज न मिलने पर हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
क्या है नई ‘हाइपोग्लॉसल नर्व स्टिमुलेशन’ तकनीक?
कैसे काम करती है: इसमें मुंह के भीतर एक विशेष इम्प्लांट लगाया जाता है, जो सोते समय जीभ की नस (हाइपोग्लॉसल नर्व) को सक्रिय रखता है।
फायदा: इससे सांस की नली बंद नहीं होती और मरीज सामान्य रूप से सांस ले पाता है।
सीपैप (CPAP) का बेहतर विकल्प: जो मरीज पारंपरिक सीपैप मशीन का इस्तेमाल नहीं कर पाते, उनके लिए यह इम्प्लांट तकनीक बेहद कारगर साबित हो रही है। इससे दिनभर की थकान दूर होती है और नींद की गुणवत्ता सुधरती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से दांतों का सटीक इलाज
दंत चिकित्सा के क्षेत्र में एआई की भूमिका पर बात करते हुए डॉ. नमिता शुक्ला और डॉ. अमय त्रिपाठी ने बताया कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से दांतों का इलाज अधिक सटीक और तेज़ हो गया है।
कुदरती लुक: एआई डिजिटल स्कैनर और कैमरे दांतों की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीर लेकर उनके रंग, पारदर्शिता और बनावट का विश्लेषण करते हैं।
सटीक शेड मैचिंग: पहले डॉक्टर और तकनीशियन आंखों से दांतों का रंग मिलाते थे, जिससे अंतर रह जाता था। अब एआई सॉफ्टवेयर मिनटों में सबसे सही शेड का सुझाव देता है, जिससे क्राउन, कैप, वेनियर और नकली दांत बिल्कुल प्राकृतिक लगते हैं।
समय की बचत: इससे दोबारा दांत बनाने की झंझट खत्म होती है और मरीजों का समय बचता है।
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के प्रमुख लक्षण
सोते समय बहुत तेज खर्राटे आना।
नींद के दौरान बार-बार सांस रुकना या घुटन महसूस होकर नींद खुलना।
सुबह उठने पर सिरदर्द होना या मुंह सूखना।
दिनभर थकान, आलस और काम में ध्यान न लगना।
बचाव और सावधानी के उपाय
वजन को नियंत्रित रखें और रोजाना व्यायाम करें।
धूम्रपान और शराब के सेवन से पूरी तरह परहेज करें।
पीठ के बल सोने के बजाय करवट लेकर सोएं।
यदि लगातार खर्राटे या सांस रुकने की समस्या हो, तो तुरंत ईएनटी (ENT) या स्लीप विशेषज्ञ से परामर्श लें।












