मानसून सक्रिय होने के बनेंगे संकेत
लखनऊ। वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रहों के राजा माने जाने वाले सूर्य देव 22 जून को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। सूर्य 6 जुलाई तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य का यह नक्षत्र परिवर्तन मौसम, कृषि, समाज और व्यक्ति के जीवन पर व्यापक प्रभाव डालता है। इसे वर्षा ऋतु की सक्रिय शुरुआत का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य S. S. Nagpal के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र को नमी और वर्षा से जुड़ा नक्षत्र माना जाता है, जिसका स्वामी राहु है। मान्यता है कि सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश के साथ मानसून की गतिविधियां तेज होने लगती हैं और प्रकृति में बदलाव स्पष्ट दिखाई देने लगता है। आर्द्रा से लेकर हस्त नक्षत्र तक की अवधि वर्षा और कृषि कार्यों के लिए अनुकूल मानी जाती है।

22 से 25 जून तक धरती मानी जाती है ‘रजस्वला’
परंपराओं के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र के शुरुआती चार दिनों यानी 22 जून से 25 जून तक धरती को ‘रजस्वला’ माना जाता है। इस दौरान खेतों की जुताई और कृषि संबंधी कुछ कार्यों से परहेज किया जाता है। विशेष रूप से Bihar और Jharkhand के मिथिला क्षेत्र में इसे पर्व के रूप में मनाया जाता है, जहां घरों में खीर, दाल और पूरी बनाई जाती है।
कामाख्या मंदिर में लगेगा अंबुबाची मेला
इसी अवधि में Kamakhya Temple में प्रसिद्ध Ambubachi Mela का आयोजन भी होता है, जिसे शक्ति उपासना और धार्मिक आस्था का बड़ा पर्व माना जाता है।
शिव, सूर्य, विष्णु और इंद्र की पूजा का विशेष महत्व
आर्द्रा नक्षत्र के अधिष्ठाता देव भगवान शिव के रुद्र स्वरूप माने जाते हैं। इस अवधि में भगवान शिव, सूर्यदेव, भगवान विष्णु और इंद्रदेव की पूजा विशेष फलदायी मानी गई है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय:
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप
महामृत्युंजय मंत्र का पाठ
विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ
दान-पुण्य और गौ सेवा
साधु-संत एवं ब्राह्मण सेवा
विशेष शुभ फल देने वाले माने जाते हैं। खीर, पूड़ी और आम का भोग अर्पित करना भी मंगलकारी माना गया है।
राशियों पर प्रभाव
ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल के अनुसार सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में गोचर का प्रभाव राशियों पर इस प्रकार रहेगा—
शुभ फलदायक:
मेष
मिथुन
सिंह
धनु
सामान्य फलदायक:
तुला
मकर
कुम्भ
मीन
सतर्कता बरतें:
वृषभ
कर्क
कन्या
वृश्चिक
विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्य का यह गोचर न केवल मौसम परिवर्तन बल्कि ऊर्जा, स्वास्थ्य और प्रकृति में नवजीवन का भी संकेत देता है।












