UP को मिली बड़ी सौगात: KGMU में खुला प्रदेश का पहला ‘बोन एवं टिश्यू बैंक’

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​लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में एक नया ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया है। केजीएमयू के हड्डी रोग विभाग में सोमवार को प्रदेश के पहले समग्र ‘बोन एवं टिश्यू बैंक’ (Bone & Tissue Bank) का भव्य शुभारंभ किया गया।
​सवा करोड़ रुपये की लागत से लिम्ब सेंटर के चौथे तल पर स्थापित इस बैंक से जटिल ऑर्थोपेडिक और टिश्यू संबंधी सर्जरी के लिए मरीजों को अब यूपी में ही अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले सुरक्षित ग्राफ्ट मिल सकेंगे।
​अब मरीज के शरीर से दूसरी हड्डी निकालने की जरूरत नहीं!
​उद्घाटन के दौरान कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित एलोग्राफ्ट उपलब्ध होने से अब मरीजों के अपने ही शरीर से अतिरिक्त हड्डी निकालने (ऑटोग्राफ्ट) की निर्भरता कम होगी।
​प्रमुख फायदे:
​कम दर्द और चीरा: मरीज को शरीर के दूसरे हिस्से में अतिरिक्त चीरा नहीं लगाना पड़ेगा।
​कम जोखिम: रक्तस्राव और संक्रमण जैसी डोनर-साइट जटिलताएं खत्म होंगी।
​तेज रिकवरी: जटिल ऑपरेशनों की सफलता दर बढ़ेगी और मरीज जल्द स्वस्थ हो सकेंगे।

​हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार के अनुसार, इस बैंक में हड्डी, टेंडन, लिगामेंट और अन्य मस्कुलोस्केलेटल टिश्यू का वैज्ञानिक संग्रह, प्रोसेसिंग और -80°C तक के तापमान पर सुरक्षित संरक्षण किया जाएगा।
​इसका लाभ इन जटिल मामलों में मिलेगा:
​बड़े बोन डिफेक्ट और जटिल फ्रैक्चर
​बोन ट्यूमर और लिंब साल्वेज सर्जरी
​स्पोर्ट्स इंजरी और लिगामेंट रिकंस्ट्रक्शन
​रिवीजन जॉइंट रिप्लेसमेंट और स्पाइन सर्जरी
​सिर्फ हड्डी रोग ही नहीं, इन विभागों के मरीजों को भी ीमिलेगी राहत

​डॉ. आशीष ने स्पष्ट किया कि इस बैंक का लाभ केवल ऑर्थोपेडिक विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। प्लास्टिक सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल, डेंटल, ऑन्कोलॉजी और बर्न केयर जैसे विभागों के मरीजों को भी टिश्यू ग्राफ्ट की सुविधा मिलेगी। इससे यूपी के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों (जैसे बिहार, नेपाल, एमपी) के मरीजों को भी दिल्ली या मुंबई भागने से मुक्ति मिलेगी।

बोन एवं टिश्यू बैंक के इंचार्ज डॉ. कुमार शान्तनु ने बताया कि यह सेंटर पूरी तरह से राष्ट्रीय मानकों पर तैयार किया गया है।

​अत्याधुनिक तकनीक: इसमें क्लीन रूम, स्टरलाइज़ प्रोसेसिंग यूनिट, लाइओफिलाइजर (Freeze Dryer), और -40°C व -80°C डीप फ्रीजर लगे हैं।
​ट्रैकिंग सिस्टम: मरीज की सुरक्षा के लिए हर ग्राफ्ट को एक यूनिक पहचान संख्या दी जाएगी, जिससे उसका पूरा रिकॉर्ड ट्रैक किया जा सकेगा।

​1988 की विरासत को आगे बढ़ा रहा KGMU
​डॉ. शान्तनु ने याद दिलाया कि भारत के पहले बोन बैंक की शुरुआत 1988 में मुंबई के टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल से हुई थी। उसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए केजीएमयू ने यूपी में पहला व्यापक टिश्यू बैंक स्थापित किया है।
​कब शुरू होंगी सेवाएं?
KGMU प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग से लाइसेंस मिलते ही (जिसकी प्रक्रिया अंतिम चरण में है) अगले कुछ ही दिनों में मरीजों को इसकी नियमित सेवाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी।
​कार्यक्रम के दौरान डॉ. धर्मेंद्र कुमार समेत विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ चिकित्सक और फैकल्टी मेंबर्स मौजूद रहे।

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