कागजों पर फूंक दी लाखों की दवाएं!
लखनऊ: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के यूरोलॉजी विभाग में हुए कथित दवा घोटाले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे आश्चर्यजनक खुलासे हो रहे हैं। जांच टीम को जो नए सबूत मिले हैं, वे न सिर्फ भ्रष्टाचार की गवाही दे रहे हैं, बल्कि मरीजों की जिंदगी के साथ हुए बड़े खिलवाड़ की तरफ भी इशारा कर रहे हैं।
कथित तौर पर, सिर्फ मोटी कमाई और बजट खपाने के लालच में कई ऐसे मरीजों को ‘कैंसर रोगी’ घोषित कर दिया गया, जिनकी अनिवार्य जांचें तक नहीं हुई थीं!
🚨 बिना जांच के ही बांट दीं 2-2 लाख की दवाएं
कैंसर के इलाज का पहला और सबसे बुनियादी नियम है—बायोप्सी। डॉक्टरों के मुताबिक, बिना बायोप्सी के किसी को भी कैंसर मरीज नहीं माना जा सकता। इसके बाद पैट सीटी स्कैन (PET CT Scan), एमआरआई (MRI) और ‘कैंसर स्टेजिंग’ से यह तय होता है कि बीमारी कितनी फैली है और कौन सी दवा देनी है।
लेकिन KGMU की जांच में जो सामने आया है, उसने सबके होश उड़ा दिए हैं:
लाखों का खेल: मरीजों की फाइलों में 1 से 2 लाख रुपये तक की महंगी इम्यूनोथेरेपी और अन्य कैंसर दवाओं की डोज देना दिखाया गया है।
दस्तावेज गायब: इतनी महंगी दवाएं देने के बावजूद फाइलों में कैंसर की पुष्टि करने वाली बायोप्सी रिपोर्ट ही गायब है।
पर्चे पर खेल: कुछ मामलों में तो हद ही हो गई; सिर्फ ओपीडी (OPD) के एक सामान्य पर्चे और मामूली कागजों के दम पर मरीजों को सीधे कैंसर का मरीज दिखाकर महंगी दवाएं जारी कर दी गईं।
💰 ‘असाध्य रोग योजना’ के बजट पर डाका?
जांच अधिकारियों को अब यह मजबूत शक है कि सरकार द्वारा गरीबों के लिए चलाई जाने वाली ‘असाध्य रोग योजना’ के फंड का जमकर दुरुपयोग किया गया है। कागजों पर मरीजों के नाम पर महंगी दवाएं तो निकाल ली गईं, लेकिन वे दवाएं असली मरीजों को लगीं भी या सिर्फ फाइलों में ही ‘खप’ गईं, यह एक बड़ा सवाल है।
🔍 अब ‘एक-एक’ फाइल का हो रहा है एक्सरे
घोटाले की गंभीरता को देखते हुए जांच अधिकारियों ने अब अपना शिकंजा पूरी तरह कस दिया है। जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
क्या हो रही है जांच?
अधिकारियों की टीम अब हर संदिग्ध मरीज के इलाज से जुड़े एक-एक दस्तावेज को खंगाल रही है। बायोप्सी, रेडियोलॉजिकल जांच, स्टेजिंग रिपोर्ट और दवा वितरण (Medicine Distribution) के रिकॉर्ड्स का आपस में मिलान (Cross-Verification) किया जा रहा है, ताकि इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जा सके। कई अन्य संदिग्ध फाइलें भी टीम के रडार पर हैं।
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