लखनऊ। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘उत्तर प्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान’ संगोष्ठी का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने नागरिकों से प्रकृति और जलस्रोतों को नुकसान पहुँचाने वाले भू-माफिया, वन-माफिया, खनन-माफिया और स्मगलरों के प्रति सजग रहने की अपील की। सीएम ने कहा कि एक सजग नागरिक के रूप में मातृभूमि के प्रति दायित्वों का निर्वहन करना हम सबका कर्तव्य है। उन्होंने जल की बर्बादी करने वालों पर तंज कसते हुए कहा, “कोई टोंटी चोरी कर रहा है, कोई पानी बर्बाद कर रहा है; ऐसे लोगों को समाज टोके।”
प्रदेशवासियों को दिलाए 5 संकल्प
मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रदेशवासियों को पाँच मुख्य संकल्प दिलाए:
’एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधा लगाना।
शरारती तत्वों और जीव-जंतुओं से पौधों की सुरक्षा करना।
जल संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाना।
सिंगल यूज़ प्लास्टिक का पूरी तरह बहिष्कार करना।
प्रकृति के अनुकूल जीवन शैली अपनाना।
जुलाई में लगेगा 35 करोड़ पौधों का महा-रिकॉर्ड
सीएम योगी ने बताया कि वर्ष 2017 में जहाँ वन विभाग के पास बमुश्किल 5 लाख पौधे थे, वहीं आज सरकारी और निजी नर्सरियों में 55 करोड़ पौधे तैयार हैं। पर्यावरण दिवस पर प्रदेश में 5 करोड़ पौधे लगाए जा रहे हैं, जबकि आगामी जुलाई महीने में एक व्यापक महाअभियान चलाकर एक ही दिन में 35 करोड़ पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर (एक्सप्रेसवे और फोरलेन सड़कों) का विकास करने के साथ-साथ फॉरेस्ट कवर (वन क्षेत्र) को भी बढ़ाया है, जिसके तहत अब तक 242 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं।
मौसम चक्र में बदलाव और जल संरक्षण पर जोर
ग्लोबल वार्मिंग, वायु प्रदूषण और जल संकट को बड़ी चुनौती बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण से खिलवाड़ के कारण पिछले 25 वर्षों में मौसम चक्र में डेढ़ महीने का अंतर आ चुका है। इसका सीधा असर कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और किसानों पर पड़ेगा।
जल संरक्षण की महत्ता बताते हुए उन्होंने शास्त्रों का उदाहरण दिया कि “दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है।” उन्होंने कुकरैल वन क्षेत्र, गोरखपुर के रामगढ़ताल और चिलुआताल का जिक्र करते हुए बताया कि अवैध कब्जों को हटाकर प्राकृतिक जल निकायों को संरक्षित करने से स्थानीय तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश में रामसर साइट्स की संख्या एक से बढ़कर अब 13 हो गई है, जिसमें बलिया का सुरहा ताल नवीनतम है। अंत में उन्होंने सभी ग्राम प्रधानों और नगर निकायों से अपने क्षेत्रों के तालाबों, कुओं और अमृत सरोवरों को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया।










