KGMU : संविदा सफाई कर्मचारियों ने किया कुलसचिव कार्यालय का घेराव, बढ़ी मरीजों की मुसीबतें

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​हाईलाइट्स:
​वेतन वृद्धि की मांग: न्यूनतम वेतन वृद्धि का आदेश लागू न होने से नाराज हैं कर्मचारी।
​अस्पताल में संकट: 1200 से अधिक सफाईकर्मियों के हड़ताल पर जाने से वार्डों में फैली गंदगी।
​प्रशासन का रुख: अफसरों ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा, कर्मचारियों ने परिसर में निकाला जुलूस।

​लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में शुक्रवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब संविदा पर तैनात 1200 से अधिक सफाई कर्मचारियों ने अचानक कामकाज ठप कर दिया। अपनी मांगों को लेकर नाराज कर्मचारियों ने कुलसचिव (Registrar) कार्यालय का घेराव किया और केजीएमयू प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों का आरोप है कि अधिकारी उनके हक की वेतन वृद्धि को रोकने के लिए हीलाहवाली कर रहे हैं।
​वार्डों में फैली गंदगी, डॉक्टरों ने कचरे के बीच लिया राउंड
​सफाई कर्मचारियों के सामूहिक रूप से काम बंद करने का सीधा असर केजीएमयू की व्यवस्थाओं पर पड़ा। देखते ही देखते अस्पताल के विभिन्न वार्डों से लेकर पूरे परिसर में गंदगी का अंबार लग गया।

​गंदगी और बदबू के कारण भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
​स्थिति इतनी खराब थी कि कई विभागों में डॉक्टरों को कचरे और गंदगी के बीच ही मरीजों का राउंड लेना पड़ा।
​’कार्यपरिषद की मुहर के बाद भी प्रशासन कर रहा शोषण’
​प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से बेहद कम वेतन पर काम कर रहे हैं, जबकि काम का दायरा और दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

​कर्मचारियों का आरोप: “सरकार ने न्यूनतम वेतन वृद्धि का दावा किया है और केजीएमयू कार्यपरिषद (Executive Council) ने भी इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है। इसके बावजूद केजीएमयू प्रशासन इस आदेश को लागू नहीं कर रहा है। यहाँ स्क्वायर फीट के हिसाब से सफाई का ठेका दिया गया है, हमसे पूरी मेहनत कराई जाती है लेकिन वेतन इतना कम है कि परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।”
​अफसरों ने प्रदर्शनकारियों को भगाया, परिसर में निकाला जुलूस
​कुलसचिव कार्यालय के घेराव के दौरान जब हंगामा और बवाल बढ़ने लगा, तो वहां मौजूद अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को मौके से खदेड़ दिया। अफसरों के इस रवैए से कर्मचारियों का गुस्सा और भड़क गया। इसके बाद नाराज सफाईकर्मियों ने पूरे केजीएमयू परिसर में जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया और चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे।

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