लखनऊ। राजधानी के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब गैस्ट्रो सर्जरी वार्ड में भर्ती एक बुजुर्ग मरीज का शव लहूलुहान अवस्था में पाया गया। बस्ती के रहने वाले 61 वर्षीय मुस्ताक अली ‘गॉल ब्लैडर कैंसर’ (Advanced Adeno Carcinoma) से जूझ रहे थे और यहाँ डॉ. आशीष सिंह की देखरेख में उपचाराधीन थे।
घटना का विवरण: सुबह बिस्तर पर मिला खून ही खून
संस्थान प्रशासन के अनुसार, रविवार (17 अप्रैल) की रात तक मुस्ताक अली की हालत स्थिर थी। वे सहज थे और वार्ड स्टाफ से सामान्य बातचीत कर रहे थे। लेकिन सोमवार सुबह स्थिति पूरी तरह बदल गई।
अलर्ट: पास के बेड पर मौजूद एक तीमारदार ने नर्सिंग स्टाफ को मुस्ताक अली की स्थिति गंभीर होने की सूचना दी।
हृदयविदारक दृश्य: जब स्टाफ मौके पर पहुँचा, तो मरीज की नब्ज गायब थी और वे बेसुध थे। मुस्ताक अली की गर्दन की दाहिनी ओर एक गहरा घाव था। उनके सिर के पास, बिस्तर और फर्श पर भारी मात्रा में खून फैला हुआ था।
इमरजेंसी रिस्पॉन्स और मौत की पुष्टि
वार्ड के नर्सिंग स्टाफ और रेजिडेंट डॉक्टरों ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए मरीज को बचाने की कोशिश की।
“प्रोटोकॉल के तहत मरीज पर तत्काल सीपीआर (CPR) प्रक्रिया शुरू की गई। रेजिडेंट डॉक्टरों की टीम ने करीब 15 मिनट तक उन्हें पुनर्जीवित करने का प्रयास किया, लेकिन शरीर में कोई गतिविधि नहीं हुई। अंततः उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।”
पुलिस जांच शुरू
अस्पताल के भीतर हुई इस संदिग्ध मौत ने सुरक्षा और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गर्दन पर मिले गहरे घाव ने मामले को पेचीदा बना दिया है।
कार्रवाई: संस्थान प्रशासन ने घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित किया।
जांच का बिंदु: पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह आत्महत्या का मामला है या इसके पीछे कोई अन्य कारण। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।












