लखनऊ । शुक्रवार को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली रंगभरी एकादशी अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इसे आमलकी एकादशी या आंवला एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस पावन तिथि पर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से पापों का क्षय होता है, करियर में उन्नति के द्वार खुलते हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है।

स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज के ज्योतिषाचार्य एस एस नागपाल ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल एकादशी तिथि 26 फरवरी को रात्रि 12 बजकर 33 मिनट से प्रारंभ होकर 27 फरवरी की रात 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। उदय तिथि के आधार पर 27 फरवरी, शुक्रवार को ही एकादशी व्रत रखा जाएगा। इसी दिन अमला एकादशी और रंगभरी एकादशी का संयोग भी रहेगा, जिससे इस तिथि का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। व्रत का पारण 28 फरवरी को प्रातःकाल किया जायेगा।
बाबा विश्वनाथ की नगरी में रंग भरी एकादशी का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है और इस पावन तिथि पर भोले के भक्त अपने आराध्य देवता के संग विशेष होली खेलते हैं, जबकि भगवान कृष्ण के लीला स्थल ब्रज में इसे रंगभरनी एकादशी के नाम से जाना जाता है और इसी दिन से यहां पर रंग वाली होली की शुरुआत होती है. इस तरह फाल्गुन मास की यह एकादशी हरि और हर दोनों की पूजा से जुड़ी हुई है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी पावन तिथि पर भगवान भोलेनाथ माता पार्वती का गौना कराने के बाद काशी पहुंचे थे. जिसके बाद काशी में उनके भक्तों ने खुशियां मनाते हुए उनके साथ जब कर पुष्प, रंग, अबीर-गुलाल और भस्म से होली खेली थी. बाबा के साथ होली मनाने की परंपरा हर साल बड़ी धूम-धाम से मनाई जाती है।












