लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में परीक्षा धांधली में फंसे शिक्षक को रिटायर्ड होने के बाद संविदा पर दोबारा नियुक्ति की प्रक्रिया शुरु हो गयी है। इसकी कुलसचिव ने विभाग को पत्र लेकर संबधित डॉक्टर की नियुक्ति को लेकर रिपोर्ट मांगी, तो तैनाती पर बवाल खड़ा हो गया। कुलसचिव व कुलपति को पत्र लिखकर विभागाध्यक्ष समेत सभी डॉक्टरों ने शिक्षक की नियुक्ति का विरोध किया। केजीएमयू से नवंबर में रिटायर्ड हुए एक डाक्टर की दोबारा नियुक्ति को लेकर विरोध शुरू हो गया है। आरोप है कि तैनात शिक्षक पर डिप्लोमा इन फार्मेसी प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लग है। बताते है कि सतर्कता विभाग की जांच के बाद शासन द्वारा वर्ष 2003 में केजीएमयू को डॉक्टर पर अभियोजन स्वीकृत किए जाने का निर्देश दिया था। जानकारी के अनुसार इसे वर्ष 2004 की कार्यपरिषद में अनुमति प्रदान की गई। इसके बाद से मामला कोर्ट में चल रहा है।
अब दोबारा चिकित्सक को तैनाती को लेक र कुलसचिव आशुतोष कुमार द्विवेदी ने चार दिसंबर को फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष को पत्र भेजा था। इसमे विभागाध्यक्ष से जानकारी मांगी गयी थी कि संबंधित चिकित्सक के विरुद्ध कोई प्रतिकूल प्रविष्ट तो नहीं है, जिससे नियमानुसार अागे की कार्रवाई की जा सके। विभागाध्यक्ष ने सभी विभागीय डॉक्टरों के साथ बैठक की आैर इसमें 11 डाक्टरों ने एक पत्र पर हस्ताक्षर कर कुलपति-कुलसचिव को भेजे पत्र में संबंधित चिकित्सक पर मुकदमा व डिप्लोमा फार्मेसी परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों की जानकारी दे दी गयी। यही नहीं विभाग में दोबारा तैनाती का भी विरोध किया। बताते चले कि सभी आरोपों को अनदेखा कर चिकित्सक को विजिलेंस ऑफीसर बना दिया था। मंत्री के निर्देश पर सितंबर में चिकित्सा शिक्षा विभाग के उपसचिव कुलदीप कुमार रस्तोगी ने जांच कर रिपोर्ट तलब की। मगर, जांच रिपोर्ट को लेकर अभी तक चुप्पी मार ली है।
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