लखनऊ। अगर आपके बच्चे का गला कुछ दिन से खराब है। उसे बुखार के साथ ही गले में यदि लगातार संक्रमण रहता है। इसके साथ ही यदि गले के अंदरूनी हिस्से में सूजन और जलन है तो संजीदा हो जाएं। यह रूमेटिक बुखार के लक्षण हो सकते हैं। इस प्रकार के बुखार में पैर और चेहरे के साथ ही शरीर में सूजन बढ़ जाती है। गले में यह संक्रमण स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया के द्वारा होता है। इसे रूमेटिक दिल की बीमारी (आरएचडी) कहते हैं। यह बातें रविवार को कार्डियक वैस्कुलर एंड थोरेसिक प्रोग्रेसिव एसोसिएशन द्वारा पीजीआई में आयोजित दिल के वाल्व की मरम्मत पर विषय पर आयोजित वर्कशाप में बंगलुरु के हार्ट सर्जन डॉ. प्रशन्ना सिम्हा ने कहीं। वर्कशाप में पीजीआई के हार्ट सर्जन डॉ. शान्तनु पाण्डेय और डॉ. गौरंग मजूमदार, लोहिया संस्थान के डॉ. धर्मेन्द्र श्रीवास्तव, के अलावा डॉ. एके श्रीवास्तव, डॉ. खालिद, डॉ. विशाल व डॉ. विजयंत ने वॉल्व की मरम्मत के बारे में जानकारी दी।
वर्कशाप के आयोजिक सचिव डॉ. धमेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि यह बीमारी पांच से 15 साल के बच्चों को गिरफ्त में लेती है। यह बीमारी बच्चों के दिल के वाल्व में सिकुड़न के साथ ही दिल कमजोर कर देती है। इस सिकुड़न से दिल के वाल्व में लीकेज हो जाता है। वाल्व का समुचित इलाज नहीं मिलने पर दिल की धड़कन अनियंत्रित हो जाती है। इससे दिल में खून के थक्के जमने के साथ ही लकवा या पैरालिसिस और दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसका इलाज बैलून वाल्वोप्लास्टी और ओपन हार्ट सर्जरी के जरिए संभव है। यह काफी किफायती है। डॉ. शान्तनु पाण्डेय ने बताया भीड़भाड़ व अधिक जनसंख्या वाले इलाकों में रहने वाले बच्चे इस बीमारी की जद में ज्यादा आते हैं। यह बीमारी निम्न आय वर्ग के बच्चों में अधिक होती है। यदि इसका शुरूआती दौर में इलाज मिल जाए तो मरीज ठीक हो सकता है। कुछ बच्चों में वाल्व की दिक्कत जन्मजात होती है।
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