लखनऊ। गोमती नगर स्थित डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान तथा सहारा हॉस्पिटल तथा के संयुक्त तत्वावधान में देश की न्यूरोपैथोलॉजी सोसायटी के वार्षिक सम्मेलन एनपीसाइकॉन-2018 में रविवार को विशेषज्ञ डाक्टरों ने न्यूरोजनरेटिव डिजीज, वस्कु लर डिजीज, ब्रेन ट¬ूमर बीमारियों के क्लीनिकल अपडेट पर चर्चा की। सहारा शहर के आडिटोरियम में आयोजित सम्मेलन में विशेषज्ञों ने एक मत से कहा कि ब्रेन की जटिल बीमारियों के इलाज के ब्रेन बैंकिंग को बढ़ावा दिया जाए ताकि शोध कार्य में आसानी हो सके। इसके साथ ही नयी गाइडलाइन का पालन करना के साथ क्लीनिकल अपडेट भी रहना होगा, तब ही बीमारियों का उच्चस्तरीय इलाज दिया जा सकेगा।
न्यूरोजनरेटिव डिजीज पर विशेषज्ञ जेनिस हाल्टन ने जानकारी देते हुए कहा कि पार्किसन, अल्जाइमर बीमारियों पर शोध कार्यो को बढ़ावा दिये जाने की आवश्यकता है। अभी भी अल्जाइमर का इलाज कठिन है। उन्होंने मायपैथी यानी मांसपेशियों की बीमारियों पर भी जानकारी देते हुए कहा कि इस कर शुरू आत में ध्यान नहीं दिया जाता है। ऐसे में इसकी पहचान कर जांच व इलाज विशेषज्ञ डाक्टर से कराया जाना चाहिए। अक्सर यह बीमारियां वायरल संक्रमण से भी हो जाती है।
विशेषज्ञ डॉ. एसके शंकर ने कहा कि देश में ब्रेन सम्बधित बीमारियों में लक्षण से अंतर कर पाना बेहद मुश्किल होता है। इनमें से कुछ ऐसी बीमारियां भी होती है जिनका कारण नहीं पता चल पाता। ऐसे में यह बीमारियां जटिल हो जाती है आैर इलाज मुश्किल हो जाता है। ब्रेन से जुड़ी बीमारियों पर शोध के साथ ही प्रशिक्षण भी दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा संस्थान में ब्रेन बैंकिंग सिस्टम होना चाहिए। ताकि शोध के लिए इस ब्रेन का प्रयोग किया जा सके। उन्होंने बताया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज की ओर से बंगलुरु में देश का पहला ब्रेन बैंक बनाया गया है।
सम्मेलन में पीजीआई चंडीगढ़ के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. बीडी राडोत्रा ने बताया कि कोई भी ऐसा तत्व जो शरीर में जाकर खून को गाढ़ा करने का काम करता है, उससे रक्त का थक्का बनने की संभावना हो जाती है। उन्होंने बताया कि सिगरेट का अधिक सेवन करने वालों को भी ब्रेन स्ट्रोक होने का खतरा ज्यादा हो जाता है। तम्बाकू में मौजूद निकोटिन ब्लड को थिक करता है। इसके अलावा हाइपरटेंशन, डायबिटीज, एंथ्रोसाइक्लोसिस (नसों में वसा जमने की बीमारी) व शराब का सेवन करने वाले लोगों में भी ब्रोन स्ट्रोक होने की संभावना काफी ज्यादा होती है। सम्मेलन में पीजीआई के डा. शालीन, डा. यशा, डा. श्रीधर ईपारी के अलावा एनआईएमएचएएन एस बैंगलुरु से आयी डा. अनिता महादेवन ने भी ब्रेन की बीमारियों पर चर्चा की।
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