प्रॉपर्टी का मायाजाल: ब्रोकर के लुभावने वादे और जमीनी हकीकत

0
58

​लखनऊ। रियल एस्टेट बाजार में निवेश का फैसला आम आदमी के लिए जीवन की सबसे बड़ी पूंजी लगाने जैसा होता है। लेकिन अक्सर ब्रोकर और एजेंटों के आक्रामक प्रचार के चलते खरीदार बिना सोचे-समझे ऐसे सौदों में फंस जाते हैं, जिसका पछतावा उन्हें बाद में होता है।

​’मिसिंग आउट’ का डर: ब्रोकर का सबसे बड़ा हथियार
जैसे ही कोई खरीदार मकान या जमीन खरीदने में थोड़ी सी भी दिलचस्पी दिखाता है, ब्रोकर का असली खेल शुरू हो जाता है। “अगर आज नहीं खरीदा तो हाथ से सबसे बड़ा मौका निकल जाएगा” — इस तरह का मानसिक दबाव बनाकर खरीदार के मन में यह डर पैदा कर दिया जाता है कि वह दुनिया के सबसे बड़े मुनाफे से चूक रहा है। स्थिति यह बनती है कि सौदा तय होने तक खरीदार की रातों की नींद उड़ जाती है।

​खरीदारी के बाद का कड़वा सच
रजिस्ट्री होते ही हकीकत सामने आने लगती है। जिस प्रॉपर्टी को भविष्य का ‘गोल्डमाइन’ बताकर बेचा गया था, उसकी असलियत कुछ और ही निकलती है:
​किराए की सुस्ती: मकान लेने के बाद भी मनमुताबिक किराया नहीं मिलता, जिससे बैंक की ईएमआई (EMI) चुकाना भारी पड़ जाता है।
​रीसेल वैल्यू में गिरावट: प्लाट बेचने निकलो तो बाजार में उसका सही खरीदार नहीं मिलता और निवेश अटका का अटका रह जाता है।
​प्रीमियम बनाम सामान्य प्रॉपर्टी: गलतफहमी का शिकार निवेशक
निवेशक अक्सर यह भूल जाते हैं कि हर जमीन पर करोड़ों का रिटर्न नहीं मिलता। हकीकत यह है कि:
​हर मकान के आगे से नेशनल हाईवे या मेट्रो लाइन नहीं गुजरती।

​हर प्लॉट किसी बड़े मॉल या कमर्शियल हब के पास नहीं होता।
​शहर की मुख्य सड़कों पर मौजूद सीमित ‘प्रीमियम प्रॉपर्टीज’ की कीमतें आम निवेशक की पहुंच से बाहर होती हैं।
​बाजार का सीधा नियम
निवेशक लाख रुपये लगाकर करोड़ों के रिटर्न की उम्मीद करते हैं। लेकिन जो खरीदार बाजार में करोड़ों रुपये लेकर बैठा है, वह शहर के किसी अंदरूनी इलाके की आम प्रॉपर्टी नहीं, बल्कि सिर्फ ‘प्रीमियम लोकेशन’ ही खरीदेगा। इस साधारण से गणित को अनदेखा करना ही आम निवेशकों के नुकसान की सबसे बड़ी वजह बनता है।

Previous articleनयी पहल: योगी ने यूथ पॉलिसी का किया ऐलान

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here