KGMU: आरोप – प्रिंसिपल के इस्तीफे का दावा निकला झूठा’, भड़के नर्सिंग स्टूडेंट्स ने फिर शुरू किया धरना ​

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​KGMU में नर्सिंग स्टूडेंट्स का प्रदर्शन एक हफ्ते बाद फिर शुरू।
​बीमार छात्रा को छुट्टी न देने से हुई मौत का है पूरा मामला।
​छात्रों का आरोप- प्रदर्शन खत्म कराने के लिए प्रशासन ने बोला था झूठ।
​डीन और प्रिंसिपल के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं स्टूडेंट्स।

​लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) में एक हफ्ते की शांति के बाद सोमवार को फिर से हंगामा शुरू हो गया है। नर्सिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स ने प्रशासन पर गुमराह करने और झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए दोबारा धरना शुरू कर दिया है। छात्रों का कहना है कि उन्हें शांत कराने के लिए प्रिंसिपल के इस्तीफे की झूठी खबर फैलाई गई थी।
​क्या है पूरा मामला?
विवाद की जड़ बीएससी नर्सिंग की छात्रा दिव्यांशी यादव की मौत है। डेंगू से पीड़ित होने के बावजूद उसे कथित तौर पर कॉलेज से छुट्टी नहीं दी गई थी। छुट्टी न मिलने के कारण उसके इलाज में देरी हुई और अंततः वाराणसी में उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद छात्रों ने कॉलेज की लचर व्यवस्था, परिसर में जलभराव, गंदगी और मच्छरों के लार्वा मिलने को लेकर मोर्चा खोल दिया था।

​प्रशासन पर लगा झूठ बोलने का आरोप
प्रदर्शनकारी छात्राओं का कहना है कि जब उन्होंने अपनी साथी की मौत के खिलाफ आवाज उठाई थी, तो उन्हें यह कहकर शांत करा दिया गया था कि नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल सूचना राय भौमिक ने इस्तीफा दे दिया है। यह आश्वासन मिलने के बाद छात्रों ने धरना खत्म कर दिया था। लेकिन, हाल ही में हुई एक बैठक में खुलासा हुआ कि प्रिंसिपल ने कोई इस्तीफा नहीं दिया है और न ही डीन डॉ. अमिता पांडेय इस्तीफा देंगी।

​शनिवार की डेडलाइन खत्म, नहीं हुई सुनवाई
छात्राओं के मुताबिक, पिछले सप्ताह प्रदर्शन के दौरान कुलपति ने उनकी मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया था। प्रशासन ने शनिवार (26 सितंबर) तक इस मामले में फैसले की जानकारी देने का वादा किया था। तय समय बीत जाने के बाद भी न तो कोई फैसला आया और न ही छात्रों की कोई सुनवाई हुई। इसी अनदेखी से नाराज होकर सोमवार को स्टूडेंट्स को फिर से धरने पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा।

​क्या हैं छात्रों की मांगें?
प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगें स्पष्ट हैं:
​नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल और डीन तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें।
​छात्रा दिव्यांशी की मौत के मामले में कॉलेज प्रशासन अपनी जवाबदेही तय करे।
​कॉलेज में चल रही प्रशासनिक मनमानी पर रोक लगाई जाए।
​फिलहाल, KGMU कैंपस में तनाव का माहौल है और छात्र अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। देखना यह होगा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन अब इस मामले को कैसे संभालता है।

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