बलरामपुर अस्पताल में बधिर बच्चों ने सिखाए इशारे
लखनऊ। अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा सप्ताह के अवसर पर बलरामपुर अस्पताल परिसर में एक विशेष जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘डेफ वूमेन वेलफेयर फाउंडेशन’ द्वारा दिव्यंगजन कल्याण अधिकारी शशांक सिंह के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बधिर समुदाय के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना और समाज में समावेशी संचार (इंक्लूसिव कम्युनिकेशन) को बढ़ावा देना था।
मासूमों ने संभाली मास्टर ट्रेनर की कमान
कार्यक्रम का सबसे मुख्य आकर्षण बधिर बच्चों द्वारा दी गई ट्रेनिंग रही। बच्चे—अहमद, इरम, शालिनी, रिमझिम, अर्शी, सौरभ और सावित्री ने स्वयं आगे बढ़कर प्रतिभागियों को सांकेतिक भाषा (साइन लैंग्वेज) के मूलभूत शब्द और ‘डेफ कल्चर’ की बारीकियों से रूबरू कराया। बच्चों के इस प्रयास ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को बेहद प्रभावित किया।
नर्सिंग छात्रों और विशेषज्ञों ने सीखे सांकेतिक शब्द
कार्यक्रम में ‘स्कूल ऑफ नर्सिंग’ के छात्र-छात्राओं और अस्पताल स्टाफ ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। नर्सिंग ट्यूटर सुश्री प्रिया सक्सेना और योग विशेषज्ञ डॉ. नन्दलाल यादव समेत सभी उपस्थित प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सांकेतिक भाषा के अलग-अलग इशारे सीखे और बधिर संस्कृति को समझा।
समावेशी समाज के लिए निरंतर प्रयास
कार्यक्रम का कुशल संचालन सांकेतिक भाषा अनुवादक सुश्री शबाना खान ने किया, जबकि संस्था की कोषाध्यक्ष सुश्री मनीषा रस्तोगी भी इस अवसर पर विशेष रूप से मौजूद रहीं। संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि बधिर समुदाय और आम समाज के बीच संवाद के अंतर को खत्म करने और आपसी समझ को मजबूत करने के लिए इस तरह के जागरूकता अभियान भविष्य में भी लगातार चलाए जाते रहेंगे। इस अवसर पर योग शिक्षक डा. जिज्ञासु अन्य वरिष्ठ लोक मौजूद थे।












