लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के एपेक्स ट्रामा सेंटर के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्थिरोग (Orthopaedics) विभाग के विशेषज्ञों ने हाल ही में हृदय रोग से पीड़ित एक बुजुर्ग मरीज की अत्यंत जटिल और दुर्लभ हिप फ्रैक्चर सर्जरी को सफलता पूर्वक अंजाम दिया है।
⚠️ क्यों इतना हाई-रिस्क था यह ऑपरेशन?
मरीज की स्थिति चिकित्सा विज्ञान के दृष्टिकोण से बेहद चुनौतीपूर्ण थी:
हाल ही में पड़ा था दिल का दौरा: महज दो महीने पहले मरीज को गंभीर हृदयाघात हुआ था, जिसके बाद उनकी धमनियों में दो ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट (Drug-Eluting Stents) डाले गए थे।
खून पतला करने की दवाएं: मरीज Dual Antiplatelet Therapy (DAPT) पर थे।
दोहरा खतरा: सर्जरी के दौरान खून बंद न होने (अत्यधिक रक्तस्राव) का जोखिम था। वहीं दूसरी ओर, यदि खून पतला करने की दवाएं बंद की जातीं, तो स्टेंट में थक्का जमने (Stent Thrombosis) का जानलेवा खतरा था।
विशेषज्ञों की राय: बुजुर्गों में हिप फ्रैक्चर एक ऑर्थोपेडिक इमरजेंसी होता है। यदि समय पर ऑपरेशन न हो, तो निमोनिया, डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT), बेड सोर्स और मौत का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
🏥 कैसे मिली सफलता? Multi-Disciplinary दृष्टिकोण
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए ऑर्थोपेडिक्स, कार्डियोलॉजी और एनेस्थीसियोलॉजी विभागों के डॉक्टरों ने एक साथ मिलकर ‘मल्टी-डिसीप्लिनरी’ (बहुविषयक) ट्रीटमेंट प्लान तैयार किया:
सटीक एनेस्थीसिया: Ultrasound-Guided Continuous Spinal Anesthesia का उपयोग किया गया, जिससे ऑपरेशन के दौरान मरीज का ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन पूरी तरह नियंत्रित रही।
माइक्रो-सर्जिकल तकनीक: डॉक्टरों ने न्यूनतम रक्तस्राव सुनिश्चित करते हुए सूक्ष्म सर्जिकल तकनीकों का प्रयोग किया।
👨⚕️ ये रहे इस जीवनरक्षक टीम के हीरो
इस जटिल और सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली प्रमुख मेडिकल टीम:
मुख्य सर्जन (टीम लीड): डॉ. पुलक शर्मा (अतिरिक्त प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, ऑर्थोपेडिक्स)
एनेस्थीसिया टीम लीड: डॉ. वंशप्रिया
सर्जिकल टीम सदस्य: डॉ. फुरकान, डॉ. सुजीत, डॉ. अभिषेक एवं डॉ. विकास
📈 मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार
ऑपरेशन के तीन हफ्ते बाद मरीज तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। वे अब सहारे की मदद से चलने-फिरने लगे हैं और अपने दैनिक कार्य (Activities of Daily Living) खुद करने में सक्षम हैं।
💬 निदेशक प्रो. आर. के. धीमन का जताया आभार
सफल ऑपरेशन के बाद मेडिकल टीम ने एसजीपीजीआईएमएस के निदेशक प्रो. (डॉ.) आर. के. धीमन के प्रति आभार व्यक्त किया। टीम ने कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व, अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, क्रिटिकल केयर सुविधाओं और बेहतरीन प्रशासनिक सहयोग के कारण ही इस तरह के अत्यंत जोखिम वाले (High-Risk) मरीजों का इलाज संभव हो पाता है।
चिकित्सकों ने सलाह दी कि इस प्रकार की जटिल सर्जरीज केवल अत्याधुनिक सुविधाओं वाले Tertiary Care (तृतीयक) चिकित्सा संस्थानों में ही कराई जानी चाहिए।












