लखनऊ। मरीजों के बेहतरीन इलाज के साथ-साथ चिकित्सा अनुसंधान (मेडिकल रिसर्च) के क्षेत्र में लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) ने वैश्विक स्तर पर अपनी सफलता का परचम लहराया है। अमेरिका की प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा जारी दुनिया के ‘शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों’ की सूची में एसजीपीजीआई के 20 डॉक्टर-वैज्ञानिकों ने अपनी जगह बनाई है। इनमें 18 प्रोफेसर और 2 पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो शामिल हैं।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि एसजीपीजीआई में हो रहा शोध न केवल देश में प्रासंगिक है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय पर भी अपना गहरा प्रभाव छोड़ रहा है।
इन विभागों का रहा शानदार प्रदर्शन
संस्थान के वैज्ञानिकों ने चिकित्सा विज्ञान की कई अलग-अलग विशेषज्ञताओं में यह मुकाम हासिल किया है। सूची में स्थान पाने वाले वैज्ञानिकों में हेपेटोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, गैस्ट्रो सर्जरी, क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, क्रिटिकल केयर मेडिसिन, एंडोक्राइनोलॉजी, एंडोक्राइन सर्जरी, पेडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और बायोस्टैटिस्टिक्स एंड हेल्थ इंफॉर्मेटिक्स जैसे विभागों के विशेषज्ञ शामिल हैं।
प्रमुख नाम जिन्होंने बढ़ाया मान
वैश्विक सूची में स्थान पाने वाले प्रमुख शोधकर्ताओं में:
निदेशक व हेपेटोलॉजी: प्रो. आर.के. धीमन, प्रो. अमित गोयल, डॉ. अजय कुमार मिश्रा
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी व पेडियाट्रिक गैस्ट्रो: प्रो. राकेश अग्रवाल, प्रो. उदय चंद्र घोषाल, प्रो. उज्ज्वल पोद्दार, प्रो. अंशु श्रीवास्तव
न्यूरोलॉजी: स्वर्गीय प्रो. यू.के. मिश्रा, प्रो. जयंती कालिता
नेफ्रोलॉजी व क्रिटिकल केयर: प्रो. नारायण प्रसाद, प्रो. मोहन गुर्जर
अन्य विभाग: प्रो. गौरव अग्रवाल (एंडोक्राइन सर्जरी), प्रो. रमा देवी मित्तल (मेडिकल जेनेटिक्स), प्रो. प्रभाकर मिश्रा व डॉ. मोना पाठक (बायोस्टैटिस्टिक्स), डॉ. रोहित सिन्हा (एंडोक्राइनोलॉजी), प्रो. स्वस्ति तिवारी (मॉलिक्यूलर मेडिसिन), डॉ. दुर्गा प्रसन्ना मिश्रा (इम्यूनोलॉजी)।
युवा शोधकर्ता: एंडोक्रिनोलॉजी विभाग की पोस्ट-डॉक्टरल फेलो डॉ. सना रज़ा और हेपेटोलॉजी विभाग की रिसर्च एसोसिएट डॉ. मनीषा दुबे।
निदेशक बोले: “पूरे संस्थान और प्रदेश के लिए गर्व का क्षण”
संस्थान के निदेशक प्रो. आर.के. धीमन ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि एसजीपीजीआई अब केवल बेहतर इलाज का ही नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय अनुसंधान का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है।
उन्होंने कहा, “यह सफलता केवल वैज्ञानिकों की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे एसजीपीजीआई की अकादमिक संस्कृति का परिणाम है। युवा शोधकर्ताओं ने जिस तरह कम समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है, वह आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है। हमें अनुसंधान और नवाचार के इस स्तर को आगे भी बनाए रखना होगा।”
यह ऐतिहासिक सफलता न केवल एसजीपीजीआई, बल्कि लखनऊ और पूरे उत्तर प्रदेश की वैज्ञानिक व चिकित्सीय साख को वैश्विक मंच पर एक नई ऊंचाई प्रदान करती है।












