PGI का कीर्तिमान: 6kg से कम वजन के दो मासूमों का रोबोटिक लिवर रिसेक्शन सफल ​

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लखनऊ। संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS) के पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर स्पेशलिटीज़ विभाग ने देश की चिकित्सा प्रणाली में एक नया इतिहास रच दिया है। संस्थान के डॉक्टरों ने हेपेटोब्लास्टोमा (लिवर कैंसर) से पीड़ित 6 किलोग्राम से कम वजन वाले दो शिशुओं का रोबोटिक लिवर रिसेक्शन (लिवर का प्रभावित हिस्सा हटाने की सर्जरी) सफलतापूर्वक संपन्न किया है। भारत में इतने कम वजन के बच्चों पर रोबोटिक तकनीक से लिवर रिसेक्शन का यह पहला सफल मामला माना जा रहा है।
​चुनौतीपूर्ण स्थिति में दो मासूमों को मिला नया जीवन
​डॉक्टरों के अनुसार, दोनों बच्चों का इलाज बेहद जटिल परिस्थितियों में किया गया। दोनों बच्चों की रिकवरी बेहतर पाई गई है और फिलहाल उनकी नियोजित एडजुवेंट कीमोथेरेपी जारी है:
​पहला मामला: 7 महीने का एक शिशु (वजन लगभग 5 किग्रा), जिसके लिवर के बाएं हिस्से में ट्यूमर था। प्री-ऑपरेटिव कीमोथेरेपी के बाद 5 सितंबर 2026 को उसकी ‘रोबोटिक लेफ्ट लेटरल सेक्शनेक्टॉमी’ की गई।
​दूसरा मामला: 7 महीने की एक मासूम बच्ची (वजन लगभग 6 किग्रा), जो लिवर कैंसर से पीड़ित थी। नियोएडजुवेंट कीमोथेरेपी के बाद 3 अक्टूबर 2026 को उसकी ‘रोबोटिक लेफ्ट हेपेटेक्टॉमी’ की गई।

​इतने छोटे बच्चों में रोबोटिक सर्जरी क्यों थी कठिन?
​शिशुओं के लिवर का ऑपरेशन चिकित्सा विज्ञान में सबसे कठिन प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है। 6 किग्रा से कम वजन वाले बच्चों के मामले में सर्जिकल टीम के सामने कई बड़ी रुकावटें थीं:
​सीमित कार्यस्थल: छोटे बच्चों के पेट के भीतर उपकरण चलाने के लिए अत्यंत कम स्थान का होना।
​अत्यधिक नाजुक शारीरिक संरचना: शिशु की रक्त वाहिकाएं (blood vessels) और पित्त नलिकाएं बहुत पतली और संवेदनशील होती हैं।
​सटीक नियंत्रण: लिवर की बची हुई कार्यक्षमता को सुरक्षित रखते हुए सर्जरी के दौरान रक्तस्राव को पूरी तरह नियंत्रित रखना।
​मल्टीडिसिप्लिनरी टीम वर्क और भविष्य की राह
​इस ऐतिहासिक ऑपरेशन को सफल बनाने में एसजीपीजीआई की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम का अहम योगदान रहा। इसमें पीडियाट्रिक सर्जिकल, एनेस्थीसिया, पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, रेडियोडायग्नोसिस और सहयोगी मेडिकल टीमों ने एक साथ मिलकर काम किया।

​यह सफलता न केवल संस्थान के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि भारत में पीडियाट्रिक रोबोटिक सर्जरी के विकास में एक बड़ा मील का पत्थर भी है। इसने साबित कर दिया है कि आधुनिक रोबोटिक तकनीक की मदद से अत्यंत कम वजन वाले शिशुओं में भी जटिल से जटिल ऑपरेशन पूरी तरह सुरक्षित, सटीक और मिनिमली इनवेसिव तरीके से किए जा सकते हैं।

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