पैरामेडिकल स्टाफ ने जाना जच्चा-बच्चा के विशेष उपचार का तरीका

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लखनऊ। वीरांगना अवंतीबाई महिला चिकित्सालय में दक्षता कार्यक्रम के पहले चरण में 11 लोगों को प्रशिक्षत किया गया, इसमें जच्चा-बच्चा से जुड़ी चिकित्सकीय सेवाएं की जानकारी दी गयी। इसके साथ ही वह तकनीक बचायी गयी। इसका उद्देश्य है जच्चा-बच्चा की मृत्युदर को कम किया जा सके। इन्फेक्शन से बचाव आैर नवजात का पुनर्जीवित करने का तरीका डमी के जरिए सिखाया गया। जिले के सभी कर्मचारियों को यह प्रशिक्षण दिया जाएगा जो कुल 37 चरणों तक चलाया जाएगा।

कार्यक्रम में मुख्य चिकित्साधिकारी डा. जीएस बाजपेयी ने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सेवा प्रदाताओं का ज्ञान आकलन किया गया है। उन्हें सीखी गयी तकनीकियों व जानकारी का जच्चा-बच्चा को सेवा प्रदान करने में प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। टीएसयूके जोनल प्रोग्राम स्पेस्लिस्ट डा. लवकुश ने बताया कि प्रसव की चार अवस्थाएं होती हैं। उसका साक्ष्य आधारित तकनीकियों द्वारा प्रबंधन करने पर जच्चा व बच्चा की मृत्युदर को कम किया जा सकता है।

प्रशिक्षुओं को इसमें दक्ष बनाने के लिए मैनीक्वींस (डमी) पर डिस्ट्रिक ट्रेनर डा. ज्योति कामले, डा. पूनम गौतम, कमलेश, क्यूआई मेंटर अनामिका वर्मा ने ट्रेनिंग व मॉकड्रिल करायी गयी, जिससे प्रसव की तृतीय अवस्था का सक्रिय प्रबंधन, पीपीएसमैनेजमेन्ट, नवजात को पुनर्जीवित करना, प्रोटोग्राफ, इन्फेक्शन प्रिवेंशन की जानकारी शामिल है।

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