असाध्य योजना के तहत हुआ बड़ा खेल? कुलपति को आज सौंपी जाएगी पहली रिपोर्ट
जांच कमेटी ने खंगाले 5,000 से अधिक कीमत वाली दवाओं और मरीजों के रिकॉर्ड
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के यूरोलॉजी विभाग में कैंसर की महंगी दवाओं में हुए कथित घपले के बाद अब हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है। अब सिर्फ यूरोलॉजी ही नहीं, बल्कि कैंसर मरीजों का इलाज करने वाले 7 अन्य विभागों में दवाओं और मरीजों के रिकॉर्ड की गहन स्क्रूटनी की जा रही है।
मामले की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय विशेष कमेटी एक्शन मोड में है और उसने तीन प्रमुख विभागों की तफ्तीश पूरी भी कर ली है।
इन 3 विभागों की जांच पूरी, खंगाले जा रहे हैं रिकॉर्ड
जांच कमेटी ने शुरुआती चरण में निम्नलिखित तीन विभागों की जांच प्रक्रिया को पूरा कर लिया है:
जनरल सर्जरी (General Surgery)
गेस्ट्रो सर्जरी (Gastro Surgery)
रेडियोथेरेपी (Radiotherapy)
कमेटी ने इन सभी विभागों से कैंसर मरीजों का पूरा ब्यौरा तलब किया था। इसमें विशेष रूप से ‘असाध्य योजना’ और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत पंजीकृत मरीजों की केस फाइलों को खंगाला गया है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम का मुख्य फोकस ऐसे मरीजों पर है, जिन्हें 5,000 रुपये से अधिक कीमत वाली कैंसर की दवाएं लिखी गई थीं। गड़बड़ी को पकड़ने के लिए टीम तीन स्तरों पर काम कर रही है:
डेटा मिलान: मरीजों के यूएचआईडी (UHID) नंबर, इलाज से जुड़े दस्तावेज, दवाओं की खरीद और उनके वास्तविक उपयोग संबंधी जानकारी का मिलान किया जा रहा है।
क्रॉस-वेरिफिकेशन: यह देखा जा रहा है कि सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले फंड और सुविधाओं का सही इस्तेमाल हुआ या नहीं।
मरीजों से सीधा फीडबैक: जांच टीम ने कुछ मरीजों से सीधे फोन पर संपर्क किया है। मरीजों से पूछा जा रहा है कि उन्हें अस्पताल से कौन सी दवाएं मिलीं, बाहर से क्या खरीदना पड़ा, इलाज की प्रक्रिया कैसी थी और इलाज शुरू होने से पहले कौन-कौन से टेस्ट कराए गए थे।
KGMU के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, तीन विभागों की जांच का काम लगभग पूरा हो चुका है। पांच सदस्यीय कमेटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट बुधवार शाम तक कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद को सौंप देगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही दोषियों के खिलाफ आगे की कड़ी कार्रवाई तय की जाएगी।












