Kgmu पावर टसल: रजिस्ट्रार के किए 9 तबादले कुलपति ने किए निरस्त

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पुराने पदों पर लौटने के निर्देश

​लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) में वाइस चांसलर (VC) और रजिस्ट्रार के बीच चल रही तनातनी अब खुल कर सतह पर आ गई है। कर्मचारियों के फेरबदल को लेकर दोनों शीर्ष अधिकारियों के बीच शक्ति प्रदर्शन का नया दौर शुरू हो गया है। हाल ही में रजिस्ट्रार की ओर से जारी किए गए नौ कर्मचारियों के तबादला आदेश को कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही प्रभावित कर्मचारियों को तुरंत उनके पुराने तैनाती स्थल पर ही कार्यभार संभालने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

​बिना अनुमति जारी हुए थे तबादला आदेश
विवाद की शुरुआत 24 सितंबर को हुई, जब रजिस्ट्रार अर्चना गहरवार ने यूनिवर्सिटी के बेहद संवेदनशील माने जाने वाले शैक्षिक और पेंशन अनुभाग में तैनात नौ कर्मचारियों के अचानक तबादले कर दिए थे। आदेश जारी होते ही यह मामला वीसी डॉ. सोनिया नित्यानंद के संज्ञान में पहुंचा। बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ ऐसे कर्मचारी भी थे, जिनका स्थानांतरण पहले भी किया जा चुका था। वीसी ने इस कदम पर कड़ा रुख अपनाते हुए रजिस्ट्रार के आदेश पर रोक लगा दी और उसे पूरी तरह खारिज कर दिया।

​व्यवस्थाएं चरमराने का दिया गया तर्क
यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से इस कार्रवाई का आधार नियमों के उल्लंघन और प्रशासनिक व्यवस्था को बताया गया है। केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि कर्मचारियों के तबादले से पहले कुलपति की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य किया गया था। इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण इन तबादलों को प्रभावी नहीं माना गया और निरस्त कर दिया गया।

​प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि शैक्षिक और पेंशन अनुभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों से एक साथ इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों को हटाने से यूनिवर्सिटी की दैनिक कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्थाएं लड़खड़ा सकती थीं। इसी वजह से कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से अपने मूल स्थानों पर लौटने के लिए कहा गया है।

​यूनिवर्सिटी परिसर में चर्चा का माहौल
एक ओर जहां रजिस्ट्रार कार्यालय प्रशासनिक अधिकारों का हवाला देकर इस तरह के फेरबदल को सामान्य प्रक्रिया बता रहा है, वहीं कुलपति कार्यालय की इस त्वरित कार्रवाई ने संदेश साफ कर दिया है कि बिना शीर्ष अनुमति के कोई भी बड़ा प्रशासनिक फैसला लागू नहीं होगा। इस फैसले के बाद केजीएमयू के प्रशासनिक गलियारों में खींचतान और कर्मचारियों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

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