एसजीपीजीआई को ICMR से मिली ₹20 करोड़ की बड़ी रिसर्च फंडिंग
लखनऊ। संजय गाँधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) ने चिकित्सा अनुसंधान (मेडिकल रिसर्च) के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की है। संस्थान ने भारतीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थानों की वैश्विक रैंकिंग में सुधार लाने के उद्देश्य से भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा आयोजित प्रतिस्पर्धी कॉल के तहत कुल लगभग 20 करोड़ रुपये की रिसर्च फंडिंग हासिल की है।
यह फंडिंग देश के शीर्ष 10 NIRF-रैंक वाले मेडिकल संस्थानों के लिए ICMR की ‘रिस्ट्रिक्टेड कॉल फ़ॉर प्रपोज़ल्स’ और ‘इंटरमीडिएट कैटेगरी’ के तहत प्रदान की गई है। इस बड़ी सफलता के तहत संस्थान के कुल 8 महत्वपूर्ण रिसर्च प्रपोज़ल को अंतिम रूप से चुना गया है।
दो प्रमुख श्रेणियों में मिली फंडिंग
NIRF कैटेगरी (₹11.2 करोड़): इस विशेष श्रेणी के तहत SGPGI के पाँच उच्च-स्तरीय रिसर्च प्रोजेक्ट्स को लगभग 11.2 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है।
इंटरमीडिएट कैटेगरी (₹8.46 करोड़): संस्थान को तीन अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के लिए ₹8.46 करोड़ की अतिरिक्त रिसर्च फंडिंग प्राप्त हुई है।
संस्थान के निदेशक प्रो. राधा कृष्ण धीमन ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता SGPGI के मजबूत रिसर्च इकोसिस्टम और विशेषज्ञों की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स का मुख्य ध्यान वैज्ञानिक खोजों को सीधे मरीजों के इलाज और देखभाल में इस्तेमाल करने (ट्रांसलेशनल रिसर्च) पर है।
संस्थान के डीन प्रो. शालीन कुमार और रिसर्च फैकल्टी इंचार्ज प्रो. विनीता अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर 81 प्रपोज़ल्स में से कड़े मूल्यांकन के बाद अंतिम 8 का चुना जाना संस्थान की वैज्ञानिक क्षमता पर मुहर लगाता है।
इन 8 प्रमुख विषयों पर होगा शोध (प्रमुख शोधकर्ता और विभाग)
MASLD (लिवर रोग): डॉ. रोहित सिन्हा (एंडोक्राइनोलॉजी) – लिवर फाइब्रोसिस को रोकने के लिए नए मॉलिक्यूलर पाथवे की जांच।
ग्लियोब्लास्टोमा (ब्रेन कैंसर): डॉ. लोकेंद्र शर्मा (मॉलिक्यूलर मेडिसिन) – मरीज के ऑर्गेनॉइड्स के जरिए पर्सनलाइज्ड कैंसर रिसर्च।
प्रेग्नेंसी एनीमिया: डॉ. आलोक कुमार (मॉलिक्यूलर मेडिसिन) – हेपसिडिन-आधारित सटीक इलाज का मूल्यांकन।
किडनी ट्रांसप्लांट: डॉ. अतुल गर्ग (माइक्रोबायोलॉजी) – ट्रांसप्लांट मरीजों में वायरल संक्रमण का जल्दी पता लगाने के लिए NGS तकनीक।
कैंसर इम्यूनोथेरेपी: डॉ. कुलवंत सिंह (हेमेटोलॉजी) – कैंसर सेल्स के थेरेपी से बचने की प्रक्रिया पर शोध।
हेपेटाइटिस C: डॉ. अमित गोयल (हेपेटोलॉजी) – RESOLVE-C ट्रायल के जरिए इलाज की अवधि को 24 हफ्ते से घटाकर 12 हफ्ते करना।
IgA नेफ्रोपैथी (किडनी रोग): डॉ. अतुल (नेफ्रोलॉजी) – किडनी की बीमारी में नए बायोमार्कर की पहचान।
नवजात शिशु देखभाल (TPN): डॉ. कीर्ति नारंजे (नियोनेटोलॉजी) – NICU के लिए ऑटोमेटेड पोषण कंपाउंडिंग सिस्टम का निर्माण।
असिस्टेंट फैकल्टी इंचार्ज डॉ. अतुल गर्ग के अनुसार, ये प्रोजेक्ट्स वायरल हेपेटाइटिस, कैंसर, नवजात शिशुओं की बीमारियों और ट्रांसप्लांट मेडिसिन जैसे गंभीर क्षेत्रों में इलाज की नई दिशा तय करेंगे।











