लखनऊ/प्रयागराज
उत्तर प्रदेश में नर्सिंग संवर्ग के गृह जनपद स्थानांतरण (Home District Transfer) को लेकर विवाद गहरा गया है। राजकीय नर्सेस संघ, उत्तर प्रदेश ने शासन स्तर पर किए जा रहे चयनात्मक (Selective) तबादलों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को एक मोर्चा खोला है। संघ का आरोप है कि बिना किसी आधिकारिक शासनादेश (Government Order) के कुछ चहेतों को विशेष लाभ दिया जा रहा है, जिससे पूरे नर्सिंग संवर्ग में भारी असंतोष और रोष व्याप्त है।
📋 मुख्य विवाद: बिना पद और बिना नीति के गृह जनपद में तैनाती
राजकीय नर्सेस संघ के महामंत्री अशोक कुमार द्वारा उपमुख्यमंत्री, अपर मुख्य सचिव और महानिदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) को भेजे गए पत्र में एक विशिष्ट मामले का हवाला दिया गया है।
प्रयागराज का मामला आया सामने: अपर मुख्य सचिव के पत्र के आधार पर महानिदेशक द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), प्रयागराज को एक आदेश जारी किया गया। इसमें एक नर्सिंग अधिकारी की तैनाती उच्च न्यायालय, प्रयागराज स्थित स्वास्थ्य विभाग की क्लिनिक में करने के निर्देश दिए गए।
नियमों की अनदेखी का आरोप: संघ का दावा है कि उक्त क्लिनिक में नर्सिंग संवर्ग का कोई भी पद स्वीकृत या सृजित (Sanctioned Post) नहीं है। इसके बावजूद, नियमों को ताक पर रखकर न सिर्फ तैनाती की गई, बल्कि संबंधित कर्मचारी को उनका गृह जनपद (प्रयागराज) भी आवंटित कर दिया गया।
🔍 ‘सहमति’ के बाद भी शासनादेश में देरी क्यों?
नर्सिंग संवर्ग लंबे समय से गृह जनपद स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग कर रहा है। संघ के अनुसार:
उपमुख्यमंत्री श्री बृजेश पाठक, अपर मुख्य सचिव और महानिदेशक इस विषय पर अपनी लिखित सहमति दे चुके हैं।
इसके बावजूद, आज तक गृह जनपद स्थानांतरण से जुड़ा कोई भी आधिकारिक शासनादेश (GO) जारी नहीं किया गया है।
महामंत्री अशोक कुमार का बयान:
“जब तक गृह जनपद में नियुक्ति या स्थानांतरण के संबंध में विधिवत शासनादेश जारी नहीं किया जाता, तब तक किसी भी कर्मचारी को यह लाभ देना नियमों और समानता के सिद्धांत के बिल्कुल विपरीत है।
⚖️ संघ की मांग: ‘या तो आदेश निरस्त हो, या सबके लिए नीति बने’
राजकीय नर्सेस संघ ने इस प्रकार की चयनात्मक और असमान व्यवस्था का पुरजोर विरोध करते हुए विभाग के सामने दो टूक मांगें रखी हैं:
समानता का अधिकार: यदि सरकार और विभाग गृह जनपद स्थानांतरण के पक्ष में हैं, तो सभी नर्सिंग कर्मियों के लिए समान रूप से लागू होने वाला एक स्पष्ट और पारदर्शी शासनादेश तत्काल जारी किया जाए।
आदेश की वापसी: जब तक सामूहिक नीति नहीं बनती, तब तक बिना शासनादेश के किए गए इस चयनात्मक स्थानांतरण आदेश को तुरंत निरस्त किया जाए।












