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धनतेरस पर बन रहा दुर्लभ संयोग, खरीदारी और पूजा के लिए जानें सबसे शुभ मुहूर्त और नियम

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​ लखनऊ । कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव (दिवाली) का महापर्व शुरू हो रहा है। इस साल यह दीपोत्सव पूरे 5 दिनों तक मनाया जाएगा। काशी पंचांग के अनुसार, धनतेरस से लेकर भाई दूज तक के सभी प्रमुख पर्वों की तिथियां इस प्रकार हैं:
​06 नवंबर: धनत्रयोदशी (धनतेरस)
​07 नवंबर: नरक चतुर्दशी एवं हनुमान जयंती
​08 नवंबर: दीपावली महा पर्व
​09 नवंबर: गोवर्धन पूजा (अन्नकूट)
​10 नवंबर: भाई दूज एवं चित्रगुप्त पूजन
​धनतेरस तिथि और दुर्लभ शुभ योग

​ ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र के अनुसार पंचांग के अनुसार, इस वर्ष त्रयोदशी तिथि 06 नवंबर (शुक्रवार) को प्रातः 11:07 बजे से शुरू होकर 07 नवंबर को प्रातः 11:44 बजे तक रहेगी। इस बार धनतेरस पर कई बेहद दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहे हैं:
​हस्त नक्षत्र का प्रभाव: इस दिन व्यापारियों के लिए अपार धन लाभ के योग बनाने वाला ‘हस्त नक्षत्र’ रहेगा, जिससे खरीदारी और व्यापार में शानदार बिक्री की संभावना है।
​शुक्र प्रदोष व्रत का संयोग: माता लक्ष्मी और धन-ऐश्वर्य के कारक ग्रह शुक्र का यह योग पूजा के फल को कई गुना बढ़ा देता है। इस दिन चंद्रमा और शुक्र कन्या राशि में संचार करेंगे।

​खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त और राहुकाल
​खरीदारी का समय: 06 नवंबर को प्रातः 11:07 बजे से 07 नवंबर को प्रातः 11:44 बजे तक।
​राहुकाल (सावधानी): शुक्रवार को प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे के बीच राहुकाल रहेगा, इस दौरान खरीदारी करने से बचें।

​पूजा के शुभ मुहूर्त
​धनतेरस की पूजा मुख्य रूप से प्रदोष काल में की जाती है। इस दिन धन के देवता कुबेर, मां लक्ष्मी और आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धनवंतरी की पूजा का विधान है।
​प्रदोष काल मुहूर्त: सायं 05:20 से 07:56 तक।
​वृषभ लग्न मुहूर्त: सायं 05:50 से 07:47 तक।

​क्या खरीदें और क्या है यम दीपदान का महत्व?
​इस दिन बर्तन, सोना, चांदी, वाहन, प्रॉपर्टी, इलेक्ट्रॉनिक सामान और वस्त्र खरीदना अत्यंत समृद्धिकारक माना जाता है। यदि सोना-चांदी खरीदना संभव न हो, तो तांबा, पीतल या फूल (कांसे) के बर्तन खरीदना भी बहुत शुभ होता है।
​इसके अलावा, इस दिन अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति पाने के लिए ‘यम दीपदान’ किया जाता है। सायंकाल में मिट्टी या आटे के दीपक में तेल डालकर चार बत्तियां जलाई जाती हैं और इसे मुख्य द्वार के पास रखा जाता है।
​विशेष धन प्राप्ति टोटका (धन पोटली)
​दीपावली पर बरकत बनाए रखने के लिए धनतेरस के दिन निम्नलिखित सामग्री एकत्र कर लें:
​एक लाल कपड़ा
​थोड़ा सा खड़ा धनिया
​5 गोमती चक्र और 5 कौड़ियां
​5 कमल गट्टा के बीज
​1 हल्दी की गांठ और थोड़ा सा खड़ा नमक
​2 या 5 रुपये का स्वच्छ सिक्का (या नया/पुराना चांदी का सिक्का)
​विधि: दीपावली की रात स्थिर लग्न (वृषभ अथवा सिंह लग्न) में लक्ष्मी और कुबेर के 11 माला मंत्रों से इस सामग्री को सिद्ध कर लें। दिवाली के बाद इसकी पोटली बनाकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख लें। इससे वर्ष भर धन का आगमन बना रहता है।

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