लखनऊ। शारदीय नवरात्र के पावन नौ दिनों में माता रानी के अलग-अलग नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि देवी के हर स्वरूप को उनका पसंदीदा भोग लगाने से माता प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
नवरात्रि के नौ दिनों के विशेष भोग
ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज ने बताया कि पहला दिन (माँ शैलपुत्री): माँ शैलपुत्री को आरोग्य और बल की प्राप्ति के लिए गाय के घी से बना व्यंजन या शुद्ध गाय का घी अर्पित किया जाता है।
दूसरा दिन (माँ ब्रह्मचारिणी): लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए माँ ब्रह्मचारिणी को शक्कर, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाएं।
तीसरा दिन (माँ चंद्रघंटा): मानसिक शांति और सुख-समृद्धि के लिए माँ चंद्रघंटा को दूध या दूध से बनी मिठाई (जैसे खीर या बर्फी) प्रिय है।
चौथा दिन (माँ कूष्मांडा): बुद्धि और यश की प्राप्ति के लिए माँ कूष्मांडा को मालपुआ, हलवा या दही-बड़ा का भोग लगाएं।
पाँचवाँ दिन (माँ स्कंदमाता): परिवार में सुख-शांति और आरोग्यता के लिए माँ स्कंदमाता को केला बेहद पसंद है।
छठा दिन (माँ कात्यायनी): आकर्षण और तेज की प्राप्ति के लिए माँ कात्यायनी को शहद (मधु) अर्पित किया जाता है।
सातवाँ दिन (माँ कालरात्रि): संकटों से मुक्ति और साहस के लिए माँ कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी चीजें का भोग लगाएं।
आठवाँ दिन (माँ महागौरी): घर में सुख-समृद्धि और शांति के लिए अष्टमी के दिन माँ महागौरी को नारियल या नारियल से बनी मिठाई अर्पित करें।
नौवाँ दिन (माँ सिद्धिदात्री): सभी सिद्धियों की प्राप्ति के लिए नवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री को हलवा, पूड़ी और चने का प्रसाद विशेष रूप से चढ़ाया जाता है।
विशेष टिप: माता को भोग लगाते समय मन में श्रद्धा और सात्विक भाव रखना सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।












