लखनऊ। शारदीय नवरात्र के पावन पर्व पर मां दुर्गा की आराधना और घटस्थापना (कलश स्थापना) का विशेष महत्व होता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, घटस्थापना हमेशा प्रतिपदा तिथि और प्रातःकाल के शुभ समय में करना श्रेष्ठ माना जाता है। यदि किसी कारणवश प्रातःकाल का समय उपलब्ध न हो, तो अभिजित मुहूर्त में भी घटस्थापना की जा सकती है।

घटस्थापना के मुख्य समय और मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल, स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज के अनुसार वैदिक पंचांग के अनुसार, घटस्थापना के लिए निम्नलिखित समय सबसे उत्तम माने गए हैं।
प्रातःकाल शुभ मुहूर्त: प्रात: 06:03 बजे से प्रात: 09:56 बजे तक।
अभिजित मुहूर्त (श्रेष्ठ समय): दिन में 11:30 बजे से दिन में 12:16 बजे तक।
नियम: घटस्थापना हमेशा मध्याह्न से पूर्व प्रतिपदा तिथि के समय ही की जाती है।
चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग
इस बार घटस्थापना के दिन (रविवार) चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग दोनों ही विद्यमान रहेंगे।
चित्रा नक्षत्र: 10 अक्टूबर को रात्रि 09:42 बजे से शुरू होकर 11 अक्टूबर को रात्रि 10:32 बजे तक रहेगा।
वैधृति योग: 10 अक्टूबर को रात्रि 10:02 बजे से शुरू होकर 11 अक्टूबर को रात्रि 09:05 बजे समाप्त होगा।
विशेष टिप: ज्योतिषीय जानकारों के अनुसार, घटस्थापना के दौरान चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग को टालने की सलाह दी जाती है, हालांकि इन्हें पूरी तरह वर्जित नहीं माना गया है। इसलिए भक्तजन निश्चिंत होकर दिए गए शुभ मुहूर्तों में कलश स्थापना कर सकते हैं।











