गृह जनपद नियुक्ति-ACP समेत इन माँगों पर आश्वासन

लखनऊ। प्रदेश के नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव अब थमता नजर आ रहा है। अपनी विभिन्न ज्वलंत समस्याओं और सेवा संबंधी लंबित माँगों को लेकर नर्सिंग संवर्ग का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री श्री बृजेश पाठक से मिला। सकारात्मक वार्ता के बाद सरकार की ओर से शीघ्र समाधान का भरोसा जताया गया है।
गृह जनपद में पदस्थापना और प्रमोशन पर बनी बात?
महामंत्री अशोक कुमार के नेतृत्व में उपमुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर हुई इस शिष्टाचार भेंट में कर्मचारियों से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर गहराई से चर्चा हुई।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रमुखता से निम्नलिखित माँगें रखीं:
गृह जनपद में नियुक्ति: स्थानांतरण नीति के तहत कर्मचारियों को उनके गृह जिले में पदस्थापित किया जाए।
पदोन्नति एवं ACP: वर्षों से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया में तेजी लाने और वित्तीय लाभ (ACP) का त्वरित निस्तारण हो।
संस्थानों के समान भत्ते: SGPGI और AIIMS जैसे उच्च शैक्षणिक संस्थानों की तर्ज पर राज्य के नर्सिंग स्टाफ को भी समान भत्ते और उच्च शिक्षा के लिए सवेतन अवकाश मिले।
महिला कर्मचारियों के लिए क्रेच: कार्यस्थल पर बच्चों की देखरेख के लिए ‘पालनाघर’ (क्रेच) की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
रिक्त पदों पर नियमित भर्ती: विभागों में खाली पड़े पदों पर संविदा की जगह स्थायी भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।
9 अक्टूबर से आंदोलन का दिया था नोटिस
वार्ता के दौरान महामंत्री अशोक कुमार ने उपमुख्यमंत्री को स्पष्ट किया कि विभागीय स्तर पर कोई सुनवाई न होने के कारण पूरे प्रदेश के नर्सेज में गहरा आक्रोश था। इसी मजबूरी के चलते संवर्ग को आगामी 9 अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन का मार्ग चुनना पड़ा था। प्रतिनिधिमंडल ने बैठक में आगामी आंदोलन का औपचारिक नोटिस और माँगों का विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा।
’नर्सेज स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़’: बृजेश पाठक
प्रतिनिधिमंडल की बातों को उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने अत्यंत गंभीरता और संवेदनशीलता से सुना। स्वास्थ्य सेवाओं में नर्सेज के अमूल्य योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा:
”सरकार कर्मचारियों के कल्याण और उनके हितों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नर्सिंग संवर्ग स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ है। शासन स्तर पर प्राथमिकताओं के आधार पर सभी जायज माँगों का शीघ्र और ठोस समाधान निकाला जाएगा।”
अध्यक्ष/महामंत्री का बयान
सकारात्मक बैठक के बाद बाहर आए महामंत्री अशोक कुमार ने सरकार के रुख की सराहना की।
”हम माननीय उपमुख्यमंत्री जी के सकारात्मक रवैये और संवेदनशीलता का स्वागत करते हैं। स्वास्थ्य मंत्री जी ने त्वरित निस्तारण का ठोस आश्वासन दिया है। हमें पूरी उम्मीद है कि 9 अक्टूबर से पहले ही शासन स्तर से लिखित आदेश जारी हो जाएँगे, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में कोई बाधा न आए।” — अशोक कुमार, महामंत्री
आगे क्या?
अब सभी की निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं। अगर 9 अक्टूबर से पहले आधिकारिक आदेश जारी हो जाते हैं, तो प्रदेश भर के अस्पतालों में प्रस्तावित हड़ताल पूरी तरह रद्द हो सकती है।












