kgmu : हृदय रोग विशेषज्ञों का अलर्ट: डायबिटीज, बीपी और पेट की चर्बी हार्ट के लिए बड़ा खतरा

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​लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ब्राउन हॉल में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ चिकित्सकों ने दिल की बीमारियों के बढ़ते खतरे और उनके मुख्य कारणों पर चिंता जताई। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि समय पर जांच, संतुलित जीवनशैली और सही इलाज के जरिए हृदय रोगों के जोखिम से बचा जा सकता है।

​डायबिटीज और बीपी हैं दिल की बीमारी के बड़े कारण: डॉ. निर्मल जोशी
​कार्यक्रम में अमेरिका से आए जार्जियन डॉ. निर्मल जोशी ने कहा कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दिल की बीमारियों का प्रमुख कारण हैं। उन्होंने बताया:
​गलत आदतें: खानपान में अधिक नमक व चीनी का सेवन और शारीरिक गतिविधि की कमी दिल को सीधा नुकसान पहुंचा रही है।

​आरामतलबी जीवनशैली: सुस्त जीवनशैली और लोगों में जागरूकता की कमी इस समस्या को और गंभीर बना रही है।
​बचाव: समय रहते बीमारियों की जांच और इलाज कराना ही बचाव का सबसे सही तरीका है।
​पेट का मोटापा और बढ़ता फैट सबसे खतरनाक: डॉ. रेनू जोशी
​डॉ. रेनू जोशी ने बताया कि पेट का मोटापा हृदय रोगों के सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है।
​जब शरीर में मसल (मांसपेशियां) कम होती हैं और फैट अधिक जमा होता है, तो मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।

​इससे बचने के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और वजन पर नियंत्रण बेहद आवश्यक है।
​युवाओं में बढ़ता खतरा चिंताजनक: डॉ. ऋषि सेठी
​केजीएमयू लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. ऋषि सेठी ने भारतीयों में कम उम्र में हो रहे दिल के दौरों पर चिंता जताई।
​एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल): जोखिम वाले मरीजों में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखना बहुत जरूरी है।
​प्रमुख कारक: तंबाकू, पेट का मोटापा, खराब खानपान और शारीरिक निष्क्रियता युवाओं को भी शिकार बना रही है।
​सलाह: युवाओं को नियमित व्यायाम के साथ-साथ समय-समय पर ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए।

​समय पर जांच और जागरूकता ही बचाव: डॉ. सोनिया नित्यानंद
​केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि दिल के रोगों से बचने के लिए शुरुआती दौर में ही जोखिम कारकों की पहचान जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि जागरूकता के जरिए डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, मोटापा और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर हृदय रोग के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
​कार्यक्रम में डॉ. आयुष शुक्ला, डॉ. अक्षय प्रधान समेत कई वरिष्ठ डॉक्टर, कर्मचारी व मेडिकल छात्र उपस्थित रहे।

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