लोहिया संस्थान में हार्ट फेल्योर और पल्मोनरी हाइपरटेंशन क्लीनिक शुरू: जानें ओपीडी का समय, डॉक्टर और लक्षण ​

0
69

लखनऊ: डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के कार्डियोलॉजी विभाग में ‘हार्ट फेल्योर एवं पल्मोनरी हाइपरटेंशन क्लिनिक’ की शुरुआत की गई है। संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी. एम. सिंह ने शनिवार को इस विशेष क्लिनिक का उद्घाटन किया। इसका मुख्य उद्देश्य गंभीर हृदय और फेफड़ों की समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को एक ही छत के नीचे विशेष देखभाल और निरंतर फॉलो-अप की सुविधा प्रदान करना है।

​क्लीनिक की समय सारणी और स्थान
​दिन: प्रत्येक शनिवार
​समय: सुबह 9:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक
​स्थान: कार्डियोलॉजी ओपीडी, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ
​विशेषज्ञ टीम: डॉ. आशीष झा एवं डॉ. मिथिलेश यादव (कार्डियोलॉजी विभाग)
​मिलेगी व्यापक जांच और काउंसिलिंग सुविधा
​क्लिनिक में आने वाले मरीजों को केवल दवाएं ही नहीं दी जाएंगी, बल्कि उनकी स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन भी होगा:
​जांच और मूल्यांकन: ईसीजी (ECG), इकोकार्डियोग्राफी (Echocardiography), रक्तचाप, हृदय गति, वजन और सूजन का नियमित आकलन।
​परामर्श और जीवनशैली गाइड: दवाओं के सही सेवन, नमक व तरल पदार्थ (पानी) की मात्रा, सुरक्षित व्यायाम और बीमारी के बिगड़ने वाले शुरुआती लक्षणों की पहचान के लिए विशेष काउंसिलिंग।

​बीमारी को समझें: लक्षण और कारण
​1. हार्ट फेल्योर (Heart Failure)
​क्या है: इसका मतलब हृदय का रुकना नहीं है, बल्कि यह स्थिति तब होती है जब दिल शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त रक्त पंप नहीं कर पाता।
​प्रमुख कारण: कोरोनरी आर्टरी डिजीज, पुराना हार्ट अटैक, हाई बीपी, वाल्व की समस्याएं या दिल की मांसपेशियों की बीमारी।
​लक्षण: चलने या सीढ़ी चढ़ने पर सांस फूलना, जल्दी थकान, पैरों में सूजन, लेटने पर सांस लेने में दिक्कत, रात में अचानक सांस फूलकर नींद खुलना और अचानक वजन बढ़ना।
​2. पल्मोनरी हाइपरटेंशन (Pulmonary Hypertension)
​क्या है: हृदय से फेफड़ों तक खून ले जाने वाली धमनियों में दबाव असामान्य रूप से बढ़ना। इससे दिल के दाहिने हिस्से पर असर पड़ता है और ‘राइट हार्ट फेल्योर’ का खतरा रहता है।

​प्रमुख कारण: जन्मजात हृदय रोग, फेफड़ों की पुरानी बीमारियां या रक्त के थक्के (Blood Clots)।
​लक्षण: काम करने पर सांस फूलना, अत्यधिक थकान, चक्कर या बेहोशी, छाती में दर्द/भारीपन, दिल की धड़कन तेज होना और ऑक्सीजन लेवल कम होना।
​किन मरीजों को क्लिनिक जाना चाहिए?
​जिन्हें पहले से हार्ट फेल्योर या पल्मोनरी हाइपरटेंशन का निदान हुआ हो।
​जिन्हें बार-बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ता हो या दवाओं के बाद भी राहत न मिल रही हो।
​जिन्हें रात में सोने के लिए कई तकियों की जरूरत पड़ती हो या सांस फूलती हो।

​जिनकी इको रिपोर्ट में पम्पिंग क्षमता कम या फेफड़ों की नसों में दबाव अधिक आया हो।
​विशेषज्ञों का क्या कहना है?
​”हार्ट फेल्योर और पल्मोनरी हाइपरटेंशन में सिर्फ एक बार का इलाज काफी नहीं होता। नियमित निगरानी और सही समय पर दवाओं में बदलाव जरूरी है। यह समर्पित क्लिनिक मरीजों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने में मददगार साबित होगा।
— प्रो. (डॉ.) सी. एम. सिंह, निदेशक, RMLIMS

​”अक्सर मरीज बीमारी के शुरुआती संकेतों को पहचान नहीं पाते और देर से अस्पताल पहुंचते हैं। क्लिनिक का मकसद मरीजों की वैज्ञानिक निगरानी करना, दवाओं को उनके अनुसार सेट करना और बार-बार अस्पताल में भर्ती होने की नौबत को रोकना है।”
— प्रो. (डॉ.) भुवन चंद्र तिवारी, विभागाध्यक्ष, कार्डियोलॉजी

Previous articleलखनऊ में बन रहा प्रदेश का पहला अत्याधुनिक स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here