लखनऊ में बन रहा प्रदेश का पहला अत्याधुनिक स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर

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​लखनऊ। प्रदेश के खिलाड़ियों को अब खेल के दौरान लगने वाली चोटों के इलाज और आधुनिक पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। योगी सरकार की पहल पर राजधानी लखनऊ स्थित गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में ₹7.17 करोड़ (₹716.77 लाख) की लागत से प्रदेश का पहला अत्याधुनिक स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर तैयार किया जा रहा है। खेल विभाग द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।

​एक ही छत के नीचे मिलेंगी सभी आधुनिक सुविधाएं
​यह सेंटर केवल घायल एथलीटों के इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खिलाड़ियों के समग्र प्रदर्शन को सुधारने के लिए एकीकृत केंद्र के रूप में कार्य करेगा। यहां खिलाड़ियों को:
​फिजियोथेरेपी और पुनर्वास: चोट के बाद मैदान पर सुरक्षित और त्वरित वापसी।
​मानसिक स्वास्थ्य व पोषण: विशेषज्ञ सलाह और वैज्ञानिक रणनीति।
​वैज्ञानिक मूल्यांकन: शारीरिक क्षमता और फिटनेस का निरंतर ट्रैकिंग।
​खास बात यह है कि नामांकित खिलाड़ियों के अलावा, आम जनता भी निर्धारित शुल्क देकर यहां अपनी चोटों का इलाज करा सकेगी।

​7 अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से होगा इलाज
​सेंटर का सिविल निर्माण कार्य जारी है, और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। यहां उपलब्ध प्रमुख 7 उच्चस्तरीय उपकरण:
​हॉल बॉडी क्रायोथेरेपी चैंबर: -120°C से -140°C तापमान वाला बिजली से संचालित क्रायो चैंबर।
​रेडियल शॉकवेव थेरेपी डिवाइस: मांसपेशियों की त्वरित रिकवरी के लिए।
​टीईसीएआर (TECAR) चिकित्सा उपकरण: गहरे ऊतकों, टेंडन और लिगामेंट के त्वरित उपचार के लिए।
​वायवीय संपीड़न (Pneumatic Compression) इकाई: हाथ-पैर और कमर के इलाज के लिए।
​कॉम्बो पेन मैनेजमेंट इलेक्ट्रोथेरेपी यूनिट: TENS, माइक्रो करंट और हाई वोल्ट थेरेपी से लैस।
​क्लास-4 चिकित्सीय लेजर प्रणाली: 10 वाट से अधिक क्षमता वाली लेजर तकनीक।

​फोकस्ड शॉकवेव थेरेपी यूनिट: पीठ दर्द, गर्दन दर्द और कैल्सिफिक टेंडिनोपैथी के लिए।
​मानव संसाधन का भी होगा विकास
​खेल विभाग के विशेष सचिव कुमार विनीत के अनुसार, यह सेंटर न केवल खिलाड़ियों के इलाज का जरिया बनेगा, बल्कि प्रशिक्षकों और खेल विशेषज्ञों की क्षमता बढ़ाने के लिए एक प्रशिक्षण मंच के रूप में भी कार्य करेगा। इससे प्रदेश में आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस तकनीक का मजबूत इकोसिस्टम तैयार होगा।

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