लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI), लखनऊ के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के चिकित्सकों ने ‘होमोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया’ (HoFH) नामक एक अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित तीन वर्षीय बच्चे का ‘सीरियल प्लाज्मा एक्सचेंज’ तकनीक से सफलतापूर्वक इलाज किया है।
क्या है HoFH बीमारी और कितना था खतरा?
दुर्लभता: यह बीमारी लगभग 5 लाख लोगों में से किसी एक को होती है।
लक्षण: इसमें जन्म से ही रक्त में हानिकारक कोलेस्ट्रॉल (LDL) का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है, जिससे त्वचा और नसों पर कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है।
जोखिम: समय पर इलाज न मिलने पर हृदय की धमनियां संकरी हो सकती हैं, वाल्व खराब हो सकते हैं, और 20 वर्ष की आयु से पहले ही दिल का दौरा पड़ने का खतरा रहता है।
मामले की स्थिति: बच्चे का कोलेस्ट्रॉल स्तर 854 mg/dL तक पहुंच गया था (जो सामान्य से कई गुना अधिक है)। दवाएं इस स्तर को कम करने में नाकाम साबित हो रही थीं।
चुनौती और डॉक्टरों का ‘पीडियाट्रिक प्लाज्मा एक्सचेंज’ प्रोटोकॉल
मासूम की कम उम्र और अत्यधिक महंगी दवाइयों को ध्यान में रखते हुए, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग ने एक विशेष पीडियाट्रिक थेराप्यूटिक प्लाज्मा एक्सचेंज प्रोटोकॉल तैयार किया:
प्रक्रिया: बच्चे के रक्त को अफेरेसिस मशीन के ज़रिए प्रोसेस किया गया, जिससे कोलेस्ट्रॉल युक्त प्लाज्मा को हटाकर सुरक्षित प्रतिस्थापन द्रव मिलाया गया और स्वस्थ रक्त घटक शरीर में वापस भेजे गए।
उपचार अवधि: 20 सप्ताह तक हर हफ्ते OPD आधार पर यह प्रक्रिया दोहराई गई।
परिणाम: हर सेशन के बाद कोलेस्ट्रॉल स्तर में औसतन 70% तक की गिरावट दर्ज की गई। त्वचा पर मौजूद जमाव भी काफी कम हो गए।
भारत में सबसे कम उम्र के मरीजों में से एक
ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के डॉ. भरत सिंह के अनुसार, यह भारत में HoFH से पीड़ित उन सबसे कम उम्र के बच्चों में से एक है जिसका इतने लंबे समय तक प्लाज्मा एक्सचेंज से सफल उपचार हुआ है।
”यह मामला दुर्लभ बाल रोगों के इलाज में SGPGI की उन्नत थेराप्यूटिक अफेरेसिस सेवाओं और विशेषज्ञता की मिसाल है।”
— डॉ. भरत सिंह
विशेषज्ञों की टीम और संस्थान का योगदान
मुख्य समन्वयक: डॉ. भरत सिंह (ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन) एवं डॉ. अमिता मोइरांगथेम (मेडिकल जेनेटिक्स)।
सहयोगी टीम: प्रो. प्रीति एल्हेंस, प्रो. अनुपम वर्मा और डॉ. अजय जोसेफ।
सामाजिक सरोकार: परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए संस्थान द्वारा कुछ प्रक्रियाएं निःशुल्क आयोजित की गईं।
SGPGI के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमन ने पूरी मेडिकल टीम की सराहना की और इस ऐतिहासिक सफलता पर उन्हें बधाई दी।












