30 जुलाई से शुरू हो रहा सावन, इस बार बन रहे हैं कई दुर्लभ शुभ संयोग ​

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​ लखनऊ । भगवान शिव की उपासना का पावन महीना श्रावण (सावन) इस वर्ष 30 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जिसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व के साथ होगा। इस पूरे माह में महादेव की भक्ति का विशेष महत्व है। इस बार सावन में 4 सावन सोमवार और 4 मंगला गौरी व्रत का बेहद शुभ संयोग बन रहा है।

​🗓️ सावन सोमवार व्रत की प्रमुख तिथियां और शुभ योग
​सावन में सोमवार का दिन अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस बार चारों सोमवार पर दुर्लभ और सिद्ध योग बन रहे हैं:
​पहला सावन सोमवार (3 अगस्त): इस दिन सुकर्मा योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग रहेगा।
​दूसरा सावन सोमवार (10 अगस्त): इस दिन सोम प्रदोष व्रत का महासंयोग बन रहा है।

​तीसरा सावन सोमवार (17 अगस्त): इस दिन रवि योग, नाग पंचमी और मास शिवरात्रि का अति विशेष संयोग रहेगा।
​चौथा सावन सोमवार (24 अगस्त): इस दिन सावन के अंतिम सोमवार का व्रत रखा जाएगा।
​🌺 मांगलिक दोष दूर करेंगे ‘मंगला गौरी व्रत’
​देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सावन में मंगला गौरी व्रत किया था। यह व्रत महिलाओं के सुहाग में वृद्धि, सुख-समृद्धि और अविवाहित कन्याओं के विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करता है। साथ ही यह मंगल दोष से जुड़ी समस्याओं का निवारण करता है।

​मंगला गौरी व्रत तिथियां:
​पहला मंगला गौरी व्रत: 4 अगस्त
​दूसरा मंगला गौरी व्रत: 11 अगस्त
​तीसरा मंगला गौरी व्रत: 18 अगस्त
​चौथा मंगला गौरी व्रत: 25 अगस्त
​🔱 शिव पूजन विधि और सामग्री
​सावन सोमवार पर शिवलिंग का अभिषेक करने से औढरदानी भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होकर मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
​पूजन सामग्री: गंगाजल, दूध, दही, भस्म, सफेद चंदन, बेलपत्र, भांग-धतूरा, शहद, शक्कर, घी, कपूर, धूप और दीपक।

​परिवार सहित पूजा: भगवान शिव के साथ श्री गणेश, माता पार्वती, कार्तिकेय जी और नंदी जी की भी पूजा अवश्य करें।
​🔮 ज्योतिषीय महत्व और ग्रह दोष शांति
​मनचाहा वर और खुशहाली: सावन में भगवान शिव की उपासना से कन्याओं को योग्य जीवनसाथी का आशीर्वाद मिलता है।

​ग्रह दोष निवारण: शिव पूजा से कुंडली के सभी नवग्रह दोष शांत होते हैं।
​चंद्रमा ग्रह शांति: चंद्रमा के मंत्रों का जाप करने से मानसिक तनाव दूर होता है और चंद्र ग्रह की शांति होती है।
​रोग और कष्ट मुक्ति: महामृत्युंजय मंत्र, रूद्रसूक्त, लघु रूद्री या महारूद्री के पाठ से ग्रह पीड़ा, बीमारियां और सभी कष्ट समाप्त होते हैं।
रिपोर्ट: ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल

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