लखनऊ । औषधि प्रशासन एवं खाद्य सुरक्षा विभाग (FSDA) ने राजधानी में फर्जीवाड़े और नकली दवाओं के एक बड़े संगठित सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। FSDA की जांच टीम ने इस मामले में शामिल पांच आरोपियों के खिलाफ केसरबाग कोतवाली में औपचारिक तहरीर देकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की सिफारिश की है।
कैसे दिया जा रहा था वारदात को अंजाम?
FSDA की गहन पड़ताल में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी रद्द हो चुके दवा लाइसेंसों, फर्जी सेल्स इनवॉइस (बिलों) और बिलिंग सॉफ्टवेयर में तकनीकी हेरफेर का सहारा लेकर नकली दवाओं की खरीद-बिक्री कर रहे थे। इस गैर-कानूनी तरीके से न केवल आम जनता की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा था, बल्कि बड़े पैमाने पर जीएसटी (GST) की चोरी भी की जा रही थी।
इन 5 लोगों को बनाया गया आरोपी
जांच रिपोर्ट के आधार पर FSDA ने इस सिंडिकेट में शामिल मुख्य किरदारों को नामजद किया है:
कपिल जायसवाल: मुख्य आरोपी (प्रोपराइटर, मेसर्स शिव शक्ति मेडिकल, अमीनाबाद)
हरमीत सिंह: प्रोपराइटर, मीत एंटरप्राइजेज
प्रियांशु पाल: संचालक, विद्या फार्मा
साहिल जैदी: संचालक, आरएन फार्मा
आबिद अली अतहर
ब्लड प्रेशर की चर्चित दवाओं के नाम पर फर्जीवाड़ा
सहायक आयुक्त ब्रजेश कुमार के अनुसार, जांच के दौरान यह पाया गया कि यह सिंडिकेट विशेष रूप से ‘टेल्मस एएम’ (Telmas AM) और ‘टेल्मा एच’ (Telma H) जैसी व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली जीवनरक्षक दवाओं के नाम पर नकली कारोबार चला रहा था।
डिजिटल साक्ष्यों, जीएसटी रिकॉर्ड्स और आरोपियों के बयानों का मिलान करने के बाद FSDA ने इसे एक संगठित अपराध (Organized Crime Syndicate) माना है। फिलहाल पुलिस को साक्ष्य सौंप दिए गए हैं और मामले में आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।












