मानसून में खान पान संभलकर, यह हो सकती है लिवर डिजीज

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​ लखनऊ। मानसून में खान पान में चूक होने से लिवर की सेहत पर खतरा मंडराने लगता है। अक्सर खानपान ध्यान न देने से ये 4 गंभीर बीमारियां कर सकती हैं आपको लाचार
बना सकती है।
बरसात का सुहाना मौसम तपती गर्मी से राहत के साथ उमस और नमी भी लेकर आता है। यही नमी बैक्टीरिया और वायरस के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माहौल बनाती है। इस मौसम में हमारा खान-पान और पीने का पानी सबसे ज्यादा प्रदूषित होते है । यह सब खासकर लिवर (यकृत) पर होता है।

​ केजीएमयू के गैस्ट्रो मेडिसिन विभाग प्रमुख व विशेषज्ञ डॉक्टर सुमित रुंगटा का कहना है कि लिवर को बीमारियों से बचाने के लिए जागरुकता बेहद जरूरी है।
​🚨 बरसात में लिवर को जकड़ने वाली 4 मुख्य बीमारियां
​1. हेपेटाइटिस ए और ई यह इस मौसम की सबसे घातक और आम समस्याओं में से एक है।
​कारण: सीवर का प्रदूषित पानी जब पीने के पानी की पाइपलाइनों में मिल जाता है, तो यह वायरस पानी और भोजन के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। यह लिवर में गंभीर सूजन पैदा करता है।

​2. पीलिया (Jaundice)
​पीलिया खुद में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि लिवर के बीमार होने का सबसे बड़ा अलार्म है।
​कारण: हेपेटाइटिस संक्रमण के कारण लिवर खून में मौजूद बिलीरुबिन (Bilirubin) नामक पीले तत्व को फिल्टर नहीं कर पाता।
​लक्षण: आंखों-त्वचा का पीला पड़ना और गहरे रंग का पेशाब आना।

​3. लिवर एब्सेस (लिवर में मवाद बनना)
​बरसात के दिनों में हानिकारक अमीबा और परजीवी बेहद सक्रिय हो जाते हैं।
​कारण: दूषित भोजन के जरिए ये परजीवी पेट से होते हुए लिवर तक पहुंच जाते हैं।
​असर: लिवर में पस (मवाद) की थैलियां बन जाती हैं, जिससे पेट के दाहिने हिस्से में असहनीय दर्द और तेज बुखार होता है।

​4. सुस्त पाचन और फैटी लिवर की समस्या
​बारिश में लोग घरों में रहकर पकौड़े-समोसे जैसा तला-भुना खाना पसंद करते हैं। शारीरिक निष्क्रियता और अत्यधिक वसायुक्त भोजन से पाचन धीमा हो जाता है, जिससे पहले से मौजूद फैटी लिवर की समस्या और गंभीर रूप ले लेती है।
​⚠️ इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
​लिवर में संक्रमण होने पर शरीर ये संकेत देने लगता है:
​लगातार उल्टी या जी मिचलाना।
​पसलियों के ठीक नीचे दाहिने हिस्से में भारीपन या दर्द।
​अत्यधिक कमजोरी, थकान और भूख का पूरी तरह गायब हो जाना।

​🛡️ बचाव के अचूक उपाय:
उबला पानीपानी को अच्छी तरह उबालकर और ठंडा करके ही पीएं।पानी के जरिए हीघं सबसे ज्यादा वायरस फैलते हैं।
नो स्ट्रीट फूडखुले में कटे फल, सलाद और गोलगप्पों से पूरी तरह तौबा करें।मक्खियां का संक्रमण को सीधे पेट तक पहुंचाती हैं।
साबुन से हाथ धोएं।गंदे हाथों से वायरस सीधे लिवर को प्रभावित करते हैं।
हल्का भोजनखिचड़ी, दलिया और सूप जैसी सुपाच्य चीजें खाएं।

केजीएमयू के गैस्ट्रो मेडिसिन विभाग प्रमुख व विशेषज्ञ डॉ सुमित रुंगटा बताते हैं कि अगर आपको लगातार बुखार या पीलिया के लक्षण दिखें, तो खुद से दवाइयां लेने की गलती कतई न करें। बिना डॉक्टर की सलाह के ली गई पेनकिलर या एंटीबायोटिक्स लिवर को पूरी तरह डैमेज कर सकती हैं। तुरंत डॉक्टर से मिलें और लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) करवाएं।

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